suvichar

बाल गीत : बोझ करो कम बस्ते का

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
शुक्रवार, 21 जून 2024 (11:28 IST)
अगर कहीं चिड़िया के पापा,
मम्मी उसे भेजते शाला।
और टांग देते कंधे पर,
उसके, बस्ता सुंदर काला।
 
तो उनकी यह नन्ही बिटिया ,
पढ़ती नए-नए नित पाठ।
लेकिन थक जाने के कारण,
पढ़ती सोलह दूनी आठ।
 
वज़नदार बस्ता है उसका,
नहीं उठा पाती है बोझ।
गिरने लगी रोज गश खाकर,
चल पाती वह कितने रोज!
 
अपनी सखियों के संग मिलकर,
उसने कर दी है हड़ताल।
'बोझ करो कम, अब बस्ते का',
खबर भेज दी है भोपाल।
 
(यहां पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Holi Thandai: ऐसे बनाएं होली पर भांग की ठंडाई, त्योहार का आनंद हो जाएगा दोगुना

Holi Essay: होलाष्टक, होलिका दहन और धुलेंड़ी पर हिन्दी में रोचक निबंध

शक्ति के बिना अधूरे हैं शक्तिमान: नारी शक्ति के 8 स्वर्णिम प्रमाण

हिन्दी कविता : होलिका दहन

होली पर लघुकथा: स्मृति के रंग

सभी देखें

नवीनतम

जमाने का सबसे बड़ा रोग!

मिसाल है माननीयों की दूरदर्शिता

सपने में घर के चौखट से बातचीत

Holi n Bhang: होली पर चढ़ा भांग का नशा कैसे उतारें, पढ़ें 10 लाभकारी टिप्स

Dhulandi 2026: धुलेंडी पर क्या करें और क्या नहीं, जानिए खास बातें

अगला लेख