Dharma Sangrah

दिलों में रहेगी सदा लता ताई तुम्हारी आवाज़...

स्वरों की अनंत यात्रा, अनंत स्वर में विलीन हुई

प्रीति दुबे
संगीत की देवी को संगीत की देवी सरस्वती स्वयं पधारीं लेने 
सुरों को सुरों के उस अनंत व्योम में जो विलीन होना था।
 
 
शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी लता मंगेशकर जी जिनके नाम में ही सुर और ताल का अद्भुत समन्वय था ‘लता ‘उलट कर देखें तो “ताल” .... वे थीं साक्षात सरस्वती का अवतार।
 
लता मंगेशकर एक आवाज,एक एहसास जो महसूस होती है हर धड़कन में , जो खनकती है साँसों के तार में, वीणा की झंकार में तो; वाद्ययंत्रों के सुरम्य ताल में, सुरों की राग में। 
 
लता ताई एक ऐसी बेल (लता) हैं जो सदा अमर रहेंगी हम सबकी स्मृतियों में उनके मनोहारी स्वर पीढ़ी दर पीढ़ी हर मौसम में कोयल सी आवाज़ से गूंजते रहेंगे और वसंत का एहसास कराते रहेंगे।
 
स्वरों की अनंत यात्रा जो अनंत स्वर में विलीन हुई जो सिंचित करती रहेगी सुरों की पवित्र धारा से इस पुण्य धरा को...  ।
 
माँ सरस्वती की पुत्री सरस्वती के साथ स्वरों के व्योम में विलीन हुई। जब माँ सरस्वती स्वयं आयी हो जिन्हें साथ ले जाने,  चिर निद्रा में सुलाकर फिर एक नए जीवन में जगाने।सुरों (देवताओं)को भी सुर पसंद हैं, देवों सी दैवीय वाणी पसंद है। त्याग और संयम पसंद है जो लता ताई में सर्वदा देखने को मिला। गूंजेगा अब अमर संगीत अमर राग अमर लय अमर ताल अमर शब्दों के साथ उस अनंत महाकाश में...मेरी आवाज़ ही पहचान है... 
 
न कलम रुक रही ना आँसू थम रहे न कोई याद रुक रही बह रहे हैं शब्द आँसुओं की स्याही संग...
 
लता ताई ने अपनी आँखों से देखा था आज़ादी की लड़ाई का वो मंज़र भी इसलिए सर्वदा उनकी आवाज़ में उनके सुरों से सुसज्जित गूंजते रहेंगे ब्रह्मनाद की तरह ‘वन्दे मातरम’और ‘ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा याद करो क़ुर्बानी’ जैसे राष्ट्र्भक्ति गीत भी। वे सुनाती रहेंगी जन्मजन्मांतर आज़ादी के लिए क़ुर्बानी की कहानी भी। 
 
आज भी महसूस कर रही है ये आवाम तुम्हें लता ताई 
 
हर दिल, हर धड़कन जब ख़ुश होगा तुम्हें गाएगा, जब मचलेंगे दिल के जज़्बात तुम्हारे सुरों से उन्हें मनाएगा; उठेगी जब हूक़ कोई दिल में तुम्हारे सुरों में डूब जाएगा माँ की लोरी में, बहन की राखी में, महबूबा की चाह में , प्रेमियों की “प्रीत”  में हर जगह है,  थी और रहेगी लता ताई तुम्हारी आवाज़।
 
तुमको न भूल पाएँगे, सदा अमर रहोगी सांसों के तार में, धड़कन की आवाज़ में 
सुरों के साज़ में धरती से आकाश तलक़ गूँजेगी तुम्हारी ही सदा...
भाव भीनी श्रद्धांजलि अलविदा लता दीदी....
 

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