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शिव-ज्योति की जुगलबंदी ने उड़ाई दिग्गजों की नींद

राजबाड़ा 2 रेसीडेंसी

अरविन्द तिवारी
सोमवार, 14 दिसंबर 2020 (21:56 IST)
बात यहां से शुरू करते हैं : मोती-माधव यानी मोतीलाल वोरा और माधवराव सिंधिया की तरह ही अब मध्यप्रदेश में शिव-ज्योति यानी शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया की गाड़ी गति पकड़ने लगी है। तब वोरा और सिंधिया ने मध्यप्रदेश के तमाम कांग्रेसी दिग्गजों की नींद उड़ा दी थी तो अब शिव-ज्योति भाजपा के कई दिग्गजों के लिए परेशानी का कारण बनने वाले हैं। दोनों के बीच जो तालमेल जमा है, उससे ये तमाम आशंकाएं निर्मूल साबित हो रही हैं कि इनकी पटरी बैठेगी नहीं और गाड़ी गति पकड़ने के पहले ही कहीं भी टकरा जाएगी। फिलहाल तो ऐसे कोई आसार नजर आ नहीं रहे।
 
चर्चा में है तनखा का इंटरव्यू : कांग्रेस सांसद और सुप्रीम कोर्ट के बड़े वकील विवेक तनखा की सरलता, सहजता और सुगमता राजनीति में उनको भारी पड़ रही है। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाले 'जी-23 समूह' में शामिल होने के बाद भी तनखा गांधी परिवार के विश्वसनीय माने जाते हैं। लेकिन पिछले हफ्ते छत्तीसगढ़ के एक अखबार में छपा एक इंटरव्यू चर्चित रहा, जिसमें उन्हें कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़ा करते बताया गया। हालांकि बाद में तनखा का स्पष्टीकरण आया जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने नेतृत्व पर सवाल खड़े नहीं किए, बल्कि पार्टी की कार्यशैली को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी। तनखा का कहना है कि राज्यों में ज्यादा सक्रिय और प्रभावी तरीके से काम करने की जरूरत है ताकि पार्टी एक बड़ी फोर्स बन सके।
 
राजपूत की परेशानी का कारण : गोविंद राजपूत भले ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक हों लेकिन राजनीति की उनकी अपनी एक अलग शैली है। जिस भी विभाग के मंत्री रहते हैं वहां उनका वन मैन शो रहता है। अभी हालांकि वे मंत्री नहीं हैं लेकिन अपनी हैसियत किसी मंत्री से कम नहीं आंकते हैं। परिवहन आयुक्त के रूप में मुकेश जैन की पदस्थापना के बाद यह माना जा रहा था कि सिंधिया खेमे से वास्ता रखने वाले इन दोनों दिग्गजों की एक ही महकमे में मौजूदगी कई परेशानी दूर कर देगी। लेकिन ताजा जानकारी यह है कि फोन पर हुए एक संवाद के बाद राजपूत और जैन के बीच में दूरियां बढ़ गई हैं और इसके बाद जिस तरह की जानकारी सिंधिया तक पहुंची है, वह राजपूत के लिए परेशानी का कारण बन गई है।
 
जब हुआ कमलनाथ-सिलावट का आमना-सामना : भाजपा नेता गोविंद मालू के बेटों की शादी में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी शुभकामनाएं देने पहुंचे। जब कमलनाथ कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश कर रहे थे तब किसी समय उनकी मंत्रिपरिषद के सदस्य रहे और अब भाजपा के विधायक तुलसी सिलावट वापस लौट रहे थे। आमना-सामना ना हो इसलिए सिलावट ने अपने कदम तेज कर दिए पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल की नजर सिलावट पर पड़ गई। वे सिलावट को पकड़कर कमलनाथ के पास ले आए। पूर्व मुख्यमंत्री ने भी सौजन्यता बरतते हुए कहा, कैसे हो तुलसी। बारी सिलावट की थी और उन्होंने कहा जी मैं बिल्कुल ठीक हूं।
 
छोटे को 'बड़ा' आश्वासन : दिग्विजय सिंह कुछ दिन पहले इंदौर आए थे। रेसीडेंसी कोठी पर उन्होंने छोटे यादव को बुलाकर सबके सामने कहा, 'छोटे मैंने तेरे लिए आज तक कुछ नहीं करा, महापौर की तैयारी करो चुनाव कांग्रेस से तुम को लड़ना है।' पांच बार के पार्षद रहे छोटे यादव की यह खासियत है कि अलग-अलग वार्डों से उन्होंने चुनाव जीता है। इंदौर के महापौर का पद भले ही सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हो गया हो और विधायक संजय शुक्ला खम ठोक कर मैदान में भी आ गए हैं, लेकिन जनता का दिल जीतने में माहिर छोटे यादव दिग्विजय के आश्वासन के बाद अब पार्टी में अपनी राह आसान मान रहे हैं।
 
शिवराज-ज्योतिरादित्य ने बढ़ाई कांग्रेसियों की धड़कन : कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला के बेटे आकाश को सफल दांपत्य जीवन का आशीर्वाद देने पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेसियों के दिल की धड़कन बढ़ा दी है। दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद देने के बहाने दोनों नेताओं का बुजुर्ग भाजपा नेता विष्णु प्रसाद शुक्ला की ड्योढ़ी पर पहुंचना मात्र राजनीतिक सौजन्यता नहीं किसी दूरगामी सोच का संकेत है। चर्चा तो संजय की गाड़ी में सिंधिया की सवारी को लेकर भी है और जिस अंदाज में 'महाराज' ने कांग्रेस विधायक के प्रति अपनत्व दिखाया उसे भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
 
'इकबाल' की बुलंदी : अपनी मर्जी के मुताबिक आचरण करने वाले अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के आईएएस अफसरों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि भोपाल छोड़ने के पहले उन्हें मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस से इजाजत लेना पड़ेगी। जी हां, यह सही है। आला अफसरों को यदि निजी कार्य से 1 दिन के लिए भी भोपाल से बाहर जाना होता है तो बाकायदा मुख्य सचिव से अवकाश स्वीकृत करवाना पड़ता है। अभी तक तो होता यह था कि जिसका जब मन हुआ विभागीय दौरे के नाम पर भोपाल से बाहर निकल जाते थे और अपनी मर्जी से लौटते थे लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा है। और तो और अवकाश के दौरान भी कई बार पूछताछ हो जाती है।
 
दो की लड़ाई में तीसरे का फायदा : नीमच एसपी के लिए विनीत जैन और राजीव मिश्रा के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में थे। कहा यह जा रहा था कि जैन मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा की पसंद हैं और मिश्रा को सांसद सुधीर गुप्ता और नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार एसपी बनवाना चाहते थे। लेकिन इस खींचतान के बीच बाजी मार गए सूरज वर्मा, जिनके नाम की सिफारिश ना तो किसी मंत्री ने की थी ना सांसद या विधायक ने। असल में नेता मशक्कत करते रह गए और डीजीपी विवेक जौहरी ने मुख्यमंत्री को वर्मा जैसे निर्विवाद अफसर के नाम पर राजी कर लिया।

चलते चलते : परिवहन वाहन विभाग में इस बार जो बदलाव हुए हैं, उसके बाद भाजपा कार्यालय के प्रभारी राजेंद्र सिंह यकायक चर्चा में आ गए हैं। जरा पता कीजिए इसका कारण क्या है?

पुछल्ला : पुलिस महकमे में एसपी स्तर के कुछ अफसरों की पोस्टिंग में बदलाव के बाद जिला पाने के लिए अफसर अब राजनीतिक जोड़-तोड़ से बच रहे हैं। पता कीजिए इसका कारण क्या है?

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