Hanuman Chalisa

कब मनाया जाता है देव दीपावली पर्व, पढ़ें 2 पौराणिक एवं प्रामाणिक कथाएं

Webdunia
Dev Deepawali Katha
 
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देव दीपावली पर्व दिवाली के पंद्रह दिन बाद मनाया जाता है। यह कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार है, जो वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में मनाया जाता है। यह विश्व के सबसे प्राचीन शहर काशी की संस्कृति एवं परंपरा है।


यह पर्व काशी के ऐतिहासिक घाटों पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन मां गंगा के घाटों पर मनाया जाता है। ऐसी मान्य‍ता है कि कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन देवतागण दिवाली मनाते हैं व इसी दिन देवताओं का काशी में प्रवेश हुआ था। देव दीपावली की पृष्ठभूमि पौराणिक कथाओं से भरी हुई है। पढ़ें 2 कथा- 
 
पहली कथा :
 
इस कथा के अनुसार भगवान शंकर ने देवताओं की प्रार्थना पर सभी को उत्पीडि़त करने वाले राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया, जिसके उल्लास में देवताओं ने दीपावली मनाई, जिसे आगे चलकर देव दीपावली के रूप में मान्यता मिली।
 
 
दूसरी कथा :
 
इस कथा के अनुसार त्रिशंकु को राजर्षि विश्वामित्र ने अपने तपोबल से स्वर्ग पहुंचा दिया। देवतागण इससे उद्विग्न हो गए और त्रिशंकु को स्वर्ग से भगा दिया। शापग्रस्त त्रिशंकु अधर में लटके रहे। त्रिशंकु को स्वर्ग से निष्कासित किए जाने से क्षुब्ध विश्वामित्र ने अपने तपोबल से पृथ्वी-स्वर्ग आदि से मुक्त एक नई समूची सृष्टि की ही रचना प्रारंभ कर दी।

 
उन्होंने कुश, मिट्टी, ऊंट, बकरी-भेड़, नारियल, कोहड़ा, सिंघाड़ा आदि की रचना का क्रम प्रारंभ कर दिया। इसी क्रम में विश्वामित्र ने वर्तमान ब्रह्मा विष्णु महेश की प्रतिमा बनाकर उन्हें अभिमंत्रित कर उनमें प्राण फूंकना आरंभ किया। तब सारी सृष्टि डांवाडोल हो उठी। हर तरफ कोहराम मच गया। 
 
हाहाकार के बीच देवताओं ने राजर्षि विश्वामित्र की अभ्यर्थना की। महर्षि प्रसन्न हो गए और उन्होंने नई सृष्टि की रचना का अपना संकल्प वापस ले लिया। देवताओं और ऋषि-मुनियों में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। पृथ्वी, स्वर्ग, पाताल सभी जगह इस अवसर पर दीपावली मनाई गई। यही अवसर अब देव दीपावली के रूप में विख्यात है।

ALSO READ: मांगलिक कार्यों में पंच देव की पूजा का महत्व

ALSO READ: आने वाली है देव दिवाली, जानिए 5 खास बातें देवी लक्ष्मी और कुबेर होंगे प्रसन्न
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

शनि-केतु का बड़ा खेल: 25 नवंबर तक इन 5 राशियों पर मेहरबान रहेंगे कर्मफल दाता, बदल जाएगी तकदीर

Surya Gochar 2026: रोहिणी नक्षत्र में आ रहे हैं सूर्य देव, इन 6 राशि वालों के शुरू होंगे अच्छे दिन

नौतपा के साथ एल नीनो का डबल असर, इस बार पड़ेगी भीषण गर्मी और चलेगी खतरनाक लू

राहु का कुंभ में डेरा: 31 अक्टूबर तक इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, आएगा बंपर उछाल

सूर्य और बुध की वृषभ राशि में युति, बुधादित्य योग से 6 राशियों को होगा फायदा

सभी देखें

धर्म संसार

जून 2026 में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज, जानिए क्या कहता है ज्योतिष

Purnima date 2026: अधिकमास की पूर्णिमा का व्रत रखने का क्या है महत्व, जानिए पूजा मुहूर्त और विधि

जून 2026 में किस राशि को मिलेगा बड़ा लाभ और किसे होगा नुकसान? पढ़ें मासिक राशिफल

जून माह 2026 के प्रमुख व्रत एवं त्योहारों लिस्ट

अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, जानें महत्व, कथा और संक्षिप्त पूजा विधि

अगला लेख