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सतुवाई अमावस्या की पौराणिक कथा और महत्व

वेबदुनिया फीचर टीम
गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 (09:10 IST)
Satuvai Amavasya Story: वर्ष 2026 में सतुवाई अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। सतुवाई अमावस्या, जिसे कई क्षेत्रों में सतुआ अमावस्या या वैशाख अमावस्या भी कहा जाता है। यह हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को मनाई जाती है। यह दिन दान-पुण्य, पितृ तर्पण और सत्तू के सेवन के लिए विशेष महत्व रखता है।ALSO READ: Satuvai Amavasya 2026: सतुवाई अमावस्या 2026 कब है, जानें मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
 

सतुवाई/ वैशाख अमावस्या की पौराणिक कथा

 
बहुत समय पहले धर्मवर्ण नाम के एक विप्र थे। वह बहुत ही धार्मिक प्रवृति के थे। एक बार उन्होंने किसी महात्मा के मुख से सुना कि घोर कलियुग में भगवान विष्णु के नाम स्मरण से ज्यादा पुण्य किसी भी कार्य में नहीं है। जो पुण्य यज्ञ करने से प्राप्त होता था, उससे कहीं अधिक पुण्य फल नाम सुमिरन करने से मिल जाता है।
 
धर्मवर्ण ने इसे आत्मसात कर सन्यास लेकर भ्रमण करने निकल गए। एक दिन भ्रमण करते-करते वह पितृलोक जा पंहुचे। वहां धर्मवर्ण के पितर बहुत कष्ट में थे। पितरों ने उसे बताया कि उनकी ऐसी हालत धर्मवर्ण के सन्यास के कारण हुई है क्योंकि अब उनके लिए पिंडदान करने वाला कोई शेष नहीं है। यदि तुम वापस जाकर गृहस्थ जीवन की शुरुआत करो, संतान उत्पन्न करो तो हमें राहत मिल सकती है। साथ ही वैशाख अमावस्या के दिन विधि-विधान से पिंडदान करें।
 
धर्मवर्ण ने उन्हें वचन दिया कि वह उनकी अपेक्षाओं को अवश्य पूर्ण करेगा। तत्पश्चात धर्मवर्ण अपने सांसारिक जीवन में वापस लौट आया और वैशाख अमावस्या पर विधि विधान से पिंडदान कर अपने पितरों को मुक्ति दिलाई। 
 

पितृ आशीर्वाद की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख मास के दौरान पितर पृथ्वी लोक पर अपने वंशजों के निकट आते हैं। इस दिन जब भीषण गर्मी शुरू होती है, तब एक गरीब ब्राह्मण ने पितरों की शांति के लिए ठंडे जल और सत्तू का दान किया था। इससे उसके पितर तृप्त हुए और उन्होंने उसे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। तब से वैशाख की इस अमावस्या पर सत्तू और जल दान की परंपरा शुरू हुई। 
 

इस दिन का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यतानुसार यदि संभव हो तो उपवास रखना तथा पूजा पाठ आदि करना चाहिए। साथ ही इस दिन तामसिक वस्तुओं के सेवन तथा शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। अमावस्या पर व्यक्ति में नकारात्मक सोच बढ़ जाती है तथा इसके सेवन से शरीर पर ही नहीं, भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं। इस दिन सत्तू यानी जौ, चना और गेहूं का मिश्रण का भगवान को भोग लगाया जाता है और स्वयं भी ग्रहण किया जाता है। 
 
आयुर्वेद के अनुसार, वैशाख की गर्मी में सत्तू शरीर को शीतलता प्रदान करता है। वैशाख अमावस्या पितरों की शांति के लिए उत्तम मानी जाती है। इस दिन तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ दोष दूर होता है। साथ ही इस दिन मिट्टी के घड़े या मटका, पंखा, छाता, सत्तू, ककड़ी और तरबूज का दान करना अक्षय पुण्य देता है, तथा यह बहुत शुभ माना जाता है। 
 
इस दिन के धार्मिक महत्व के अनुसार जो व्यक्ति राहगीरों को शीतल जल पिलाता है और सत्तू खिलाता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। यह कथा इस बात पर जोर देती है कि भीषण गर्मी में प्यासे और भूखे को भोजन देना ही सबसे बड़ी सेवा है। सतुवाई अमावस्या केवल धार्मिक अनुष्ठानों का ही दिन नहीं है, बल्कि यह सात्विक जीवन, दान और पुण्य कर्म का प्रतीक भी है। यह दिन हमें यह सिखाता है कि हमारे पूर्वजों की स्मृति और उनका सम्मान हमारे जीवन में शांति और समृद्धि लाता है।
 

वैशाख मास FAQs

 
1. वैशाख मास में गंगा स्नान का समय कौन सा है?
वैशाख मास में विशेष तिथियों पर, जैसे वैशाख अर्थात् सतुवाई अमावस्या, वैशाख पूर्णिमा तथा अन्य शुभ दिनों में गंगा स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है।
 
2. वैशाख मास में क्या खास भोजन किया जाता है?
आयुर्वेद और पारंपरिक रूप से इस माह में हल्का, ताजा और मौसमी भोजन करने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से फल, दूध और हल्का पकवान स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं।
 
3. बुद्ध पूर्णिमा कब आती है?
बुद्ध पूर्णिमा वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान और निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
 
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