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maglev train : हवाई जहाज से भी तेज, मैग्लेव ट्रेन की 5 बड़ी खूबियां जो इसे बनाती हैं भविष्य का ट्रांसपोर्ट, CM योगी भी हुए दंग

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cm yogi manglave train
maglev train features speed and future transport technology : मैग्लेव (Maglev) यानी 'मैग्नेटिक लेविटेशन' तकनीक पर आधारित यह ट्रेन साधारण ट्रेनों से पूरी तरह अलग है। जापान दौरे पर सीएम योगी ने भी इसकी रफ्तार और तकनीक का अनुभव किया।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे का आखिरी दिन ऐतिहासिक रहा। यामानाशी प्रांत में सीएम योगी ने विश्व प्रसिद्ध 'मैग्लेव' (Maglev) ट्रेन में सफर किया। जब ट्रेन के भीतर लगे स्पीडोमीटर पर कांटा 500 किमी/घंटा के पार पहुँचा, तो मुख्यमंत्री भी दंग रह गए। उन्होंने इस अद्भुत रफ्तार के साथ फोटो खिंचवाई और 'थम्स अप' कर तकनीक की सराहना की।
 
आखिर क्या हैं ट्रेन की खूबियां 
 
 

1. बिना छुए पटरी पर 'तैरती' है ट्रेन

मैग्लेव ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पटरी पर दौड़ती नहीं, बल्कि शक्तिशाली चुंबकों की मदद से ट्रैक से कुछ इंच ऊपर हवा में तैरती है। ट्रेन और ट्रैक के बीच सीधा संपर्क न होने के कारण घर्षण (Friction) लगभग शून्य हो जाता है।
 

2. 500+ KM/H की सुपर स्पीड

घर्षण न होने के कारण यह ट्रेन अविश्वसनीय गति हासिल कर सकती है। जापान की मैग्लेव प्रणाली आसानी से 500 से 600 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेती है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज़ ज़मीनी परिवहन प्रणालियों में से एक बनाती है।

3. शोर और कंपन से मुक्ति

पारंपरिक ट्रेनों में पहियों और पटरी के टकराने से शोर और कंपन (Vibration) होता है। मैग्लेव में चूंकि कोई भौतिक संपर्क नहीं होता, इसलिए सफर बेहद शांत और आरामदायक होता है। यात्रियों को तेज़ रफ्तार के बावजूद झटके महसूस नहीं होते।
 

4. उच्च ऊर्जा दक्षता और कम रखरखाव

ऊर्जा की बचत: पहियों और पटरी के बीच रगड़ न होने से ऊर्जा का नुकसान कम होता है, जिससे यह तकनीक अधिक 'एनर्जी एफिशिएंट' है।
 
कम घिसावट: यांत्रिक घर्षण न होने के कारण इसके पुर्जे जल्दी खराब नहीं होते, जिससे लंबी अवधि में इसके रखरखाव (Maintenance) का खर्च पारंपरिक ट्रेनों से कम होता है।

5. बेजोड़ सुरक्षा और आधुनिक नियंत्रण

मैग्लेव ट्रेनें पूरी तरह से कंप्यूटर नियंत्रित होती हैं। इसकी उन्नत गाइडवे प्रणाली और ट्रैक डिजाइन के कारण दुर्घटना या पटरी से उतरने की संभावना न के बराबर होती है। इसे पूरी तरह 'सेफ और सस्टेनेबल' ट्रांसपोर्ट सिस्टम माना जाता है।  Edited by : Sudhir Sharma

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