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जब मेहर बाबा ने पहले ही दे दिया था विमान दुर्घटना का संकेत, जानिए क्या था वो चमत्कार?

WD Feature Desk
शुक्रवार, 13 जून 2025 (13:11 IST)
Meher Baba Prediction about plane accident: हाल ही में हुए अहमदाबाद विमान हादसे से पूरा देश सकते में हैं। उड़ान के चंद मिनटों बाद ही लन्दन जा रहा एयर इन्डिया का विमान क्रेश हो गया और उसमें सवार 241 यात्रियों और सभी चालक दल सदस्यों की मौत हो गई। इस बात का अंदाजा शायद किसी ने नहीं लगाया होगा लेकिन  क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग भविष्य को पहले ही कैसे जान लेते हैं? भारत की आध्यात्मिक धरती पर ऐसे कई संत और फकीर हुए हैं, जिनके चमत्कारों की कहानियां आज भी सुनाई जाती हैं। उन्हीं में से एक हैं मेहर बाबा, एक ऐसे संत जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने एक विमान दुर्घटना का संकेत पहले ही दे दिया था। यह घटना न केवल आश्चर्यचकित करती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वास्तव में ऐसे दिव्य संकेत हमें मिलते हैं, जिन्हें हम अक्सर समझ नहीं पाते।

मेहर बाबा की भारत से यूरोप की यात्रा
यह बात उस समय की है जब मेहर बाबा भारत से यूरोप की यात्रा पर थे। यह यात्रा उनके आध्यात्मिक कार्यों और अनुयायियों से मिलने के लिए महत्वपूर्ण थी। हवाई यात्रा का वह दौर आज जितना सुरक्षित और सुविधाजनक नहीं था। विमान बीच-बीच में ईंधन भरने के लिए रुकते थे, और यात्री भी कुछ देर आराम करते थे।

बीच यात्रा में मेहर बाबा ने आगे जाने से इनकार कर दिया
कहानी के अनुसार, मेहर बाबा जिस विमान में यात्रा कर रहे थे, वह एक पड़ाव पर ईंधन भरने के लिए रुका। सभी यात्रियों को विमान से उतरकर कुछ देर प्रतीक्षा करने का मौका मिला। जब ईंधन भर गया और उड़ान का समय हुआ, तो सभी यात्रियों को वापस विमान में बैठने के लिए कहा गया। सभी यात्री अपनी-अपनी सीटों पर बैठने लगे, लेकिन मेहर बाबा ने आगे जाने से इनकार कर दिया।
यह बात सुनकर वहां मौजूद हर कोई हैरान रह गया। बीच यात्रा से यूं बाबा का इंकार करना किसी को समझ नहीं आया। उनके अनुयायियों और विमान के कर्मचारियों ने उनसे बहुत अनुरोध किया, उनसे जानने की कोशिश की कि आखिर वह आगे क्यों नहीं जाना चाहते। लेकिन मेहर बाबा अपने निर्णय पर अडिग रहे। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे इस विमान में आगे नहीं जाएंगे। उनकी इस अजीबोगरीब हरकत के कारण विमान को उड़ान भरने में कुछ देर की देरी भी हुई।

उड़ान भरने के ठीक 15 मिनट बाद ही विमान हो गया दुर्घटनाग्रस्त
आखिरकार, मेहर बाबा के बिना ही उस विमान ने उड़ान भरी। लेकिन जो हुआ, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। आश्चर्यजनक रूप से उड़ान भरने के ठीक 15 मिनट बाद ही वह विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह खबर सुनकर हर कोई सन्न रह गया। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि उसमें सवार सभी यात्री मारे गए। यह घटना एक गहरा रहस्य छोड़ गई। जिन लोगों ने मेहर बाबा को अपनी आँखों के सामने विमान में बैठने से इनकार करते देखा था, वे दंग रह गए। यह उनके लिए एक स्पष्ट संकेत था कि मेहर बाबा को इस आने वाली दुर्घटना का पूर्वाभास था। उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति से इस त्रासदी को पहले ही देख लिया था और अपनी जान बचा ली थी, साथ ही अपने कुछ अनुयायियों को भी बचा लिया, जो उनके साथ रुक गए थे।

चमत्कार और विश्वास की कहानी
यह घटना आज भी मेहर बाबा के चमत्कार के रूप में याद की जाती है। यह सिर्फ एक हवाई जहाज दुर्घटना से बचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह दैवीय हस्तक्षेप, गहन अंतर्ज्ञान और आध्यात्मिक शक्तियों में अटूट विश्वास की कहानी है। यह हमें सिखाती है कि कभी-कभी हमें अपने अंतर्ज्ञान पर भरोसा करना चाहिए, और यह भी कि कुछ महान आत्माएं वास्तव में भविष्य को देख सकती हैं।
मेहर बाबा ने हमेशा मानवजाति को प्रेम, सेवा और आध्यात्मिक जागरण का संदेश दिया। उनकी यह कहानी उनके दिव्य गुणों और असाधारण क्षमताओं को और भी पुख़्ता करती है। आज भी उनके अनुयायी इस घटना को उनके चमत्कारों में से एक के रूप में याद करते हैं, जो यह दर्शाता है कि कुछ चीजें तर्क और विज्ञान से परे होती हैं।

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कौन थे मेहर बाबा
मेहर (मेहेर) बाबा एक रहस्यवादी सिद्ध पुरुष थे। कई वर्षों तक वे मौन साधना में रहे। मेहर बाबा के भक्त उन्हें परमेश्वर का अवतार मानते थे। वे आध्यात्मिक गुरु, सूफी, वेदांत और रहस्यवादी दर्शन से प्रभावित थे। मेहर बाबा का जन्म 25 फरवरी 1894 में पूना में एक पारसी परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम मेरवान एस। ईरानी (मेरवान शेरियर ईरानी) था। मेहर बाबा एक अच्छे कवि और वक्ता थे तथा उन्हें कई भाषाओं का ज्ञान था। 19 वर्ष की आयु में उनकी मुलाकात रहस्यदर्शी महिला संत हजरत बाबाजान से हुई और उनका जीवन बदल गया।

इसके बाद उन्होंने नागपुर के हजरत ताजुद्दीन बाबा, केदगांव के नारायण महाराज, शिर्डी के सांई बाबा और साकोरी के उपासनी महाराज अर्थात 5 महत्वपूर्ण हस्तियों को अपना गुरु माना। 7 वर्षों तक उपासनी महाराज के पास ज्ञान प्राप्त करने के बाद वे ईरानी आध्यात्म के उच्च स्तर पर पहुंच गए। तभी से उनके चेलों ने उन्हें मेहर बाबा नाम दिया, मेहर जिसका अर्थ होता है महादयालु पिता।

सन् 1925 में अवतार मेहर बाबा ने मात्र 29 वर्ष की अवस्था में 10 जुलाई से मौन प्रारंभ किया था जो सदैव अखंड रहा। महाराष्ट्र के अहमदनगर के पास मेहराबाद में मेहर बाबा का विशालकाय आश्रम हैं, जो मेहर बाबा के भक्तों की गतिविधियों का केंद्र माना जाता है। मेहराबाद में बाबा की समाधि है। इसके पहले मुंबई में उनका आश्रम था। आखिरकार एकांत वास में उपवास और तपस्या करने के दौरान उन्होंने 31 जनवरी 1969 को मेहराबाद में अपनी देह छोड़ दी थी।


 

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