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Republic Day 2026: ऑपरेशन सिंदूर पर वाद-विवाद में जीतना है तो इन दमदार पॉइंट्स को न करें मिस

WD Feature Desk
शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 (12:25 IST)
Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर वाद-विवाद (Debate) के लिए भाषण (Speech) तैयार जरूर करें लेकिन यहां कुछ खास बातें भी जान लें। यहाँ आपके भाषण की तैयारी के लिए पक्ष (Pro) और विपक्ष (Against) दोनों के मुख्य बिंदु और एक प्रभावी रूपरेखा दी गई है।
 

1. प्रस्तावना (Introduction)

"माननीय निर्णायक मंडल, आदरणीय शिक्षकगण और मेरे साथी मित्रों, आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आज जब हम संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का जश्न मना रहे हैं, मैं 'ऑपरेशन सिंदूर' (नारी सुरक्षा/सशक्तीकरण से जुड़ा अभियान) के प्रभाव और सार्थकता पर अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए यहाँ उपस्थित हूँ।"
 

2. पक्ष में तर्क (In Favor)

यदि आप ऑपरेशन का समर्थन कर रहे हैं:-
नारी सुरक्षा और सम्मान: ऑपरेशन सिंदूर न केवल अपराधियों में भय पैदा करता है, बल्कि महिलाओं के मन में सुरक्षा का भाव जगाता है।
त्वरित न्याय: पारंपरिक कानूनी प्रक्रियाओं में समय लगता है। इस तरह के विशेष ऑपरेशन पीड़ितों को त्वरित राहत और न्याय दिलाने में सहायक होते हैं।
सामाजिक सुधार: यह समाज को एक स्पष्ट संदेश देता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
संवैधानिक मूल्यों की रक्षा: हमारा संविधान हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता है। यह ऑपरेशन उसी अधिकार की रक्षा करता है।
मुख्य पंच लाइन: "जहाँ नारी की सुरक्षा सर्वोपरि होती है, वही राष्ट्र वास्तव में गणतंत्र कहलाने का हकदार है।"
 

3. विपक्ष में तर्क (Against/Critical View)

यदि आप इसकी कमियों या प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं:-
कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन: अक्सर ऐसे ऑपरेशनों में 'ड्यू प्रोसेस' (उचित कानूनी प्रक्रिया) की अनदेखी हो सकती है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।
सत्ता का दुरुपयोग: बिना निगरानी के ऐसे अभियानों का इस्तेमाल निर्दोष लोगों को परेशान करने के लिए भी किया जा सकता है।
अस्थायी समाधान: यह एक 'बैंड-एड' की तरह है। हमें स्थायी बदलाव के लिए शिक्षा और मानसिकता बदलने पर काम करना चाहिए, न कि केवल बल प्रयोग पर। जब ऑपरेशन लॉन्च किया गया तो उसे बीच में क्यों रोका गया।
न्यायपालिका की भूमिका: सजा देना न्यायालय का काम है, पुलिस या किसी विशेष इकाई का नहीं। शक्तियों का यह असंतुलन संविधान के ढांचे को कमजोर करता है।
मुख्य पंच लाइन:- "न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि कानून की मर्यादा के भीतर होता हुआ दिखना भी चाहिए।"
 

4. निष्कर्ष (Conclusion)

"अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा/चाहूँगी कि किसी भी ऑपरेशन की सफलता उसकी मंशा और उसके कार्यान्वयन (Implementation) की पारदर्शिता पर निर्भर करती है। गणतंत्र दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम एक ऐसा भारत बनाएँ जहाँ सुरक्षा के लिए किसी 'ऑपरेशन' की ज़रूरत ही न पड़े, बल्कि सुरक्षा हमारे संस्कारों का हिस्सा हो।"
 

प्रभावी भाषण के लिए कुछ टिप्स:

आंकड़े (Data): यदि आपके पास हाल के कुछ उदाहरण या सफलता के आंकड़े हों, तो उन्हें ज़रूर शामिल करें।
आवाज का उतार-चढ़ाव: वाद-विवाद में आत्मविश्वास और आवाज का मॉड्यूलेशन (Modulation) बहुत मायने रखता है।
समय सीमा: अपने मुख्य बिंदुओं को 2-3 मिनट के भीतर समेटने का अभ्यास करें।

ऑपरेशन सिंदूर के पक्ष में प्रभावी भाषण:

आदरणीय निर्णायक मंडल, माननीय शिक्षकगण और मेरे देशप्रेमी साथियों,
आप सभी को गणतंत्र दिवस की अनंत शुभकामनाएँ।
 
आज हम उस संविधान का उत्सव मना रहे हैं जो हमें समानता और स्वतंत्रता का अधिकार देता है। लेकिन क्या कोई भी अधिकार तब तक सार्थक है, जब तक हमारी बहन-बेटियाँ असुरक्षित महसूस करें? इसी प्रश्न का उत्तर है- 'ऑपरेशन सिंदूर'। मैं आज पूरी दृढ़ता के साथ इस अभियान के पक्ष में खड़ा हूँ।
 
साथियों, 'ऑपरेशन सिंदूर' मात्र एक सैन्य कार्यवाही नहीं है, बल्कि यह एक 'सामाजिक शुद्धिकरण' का अभियान है। इसके पक्ष में मेरे तर्क निम्नलिखित हैं:
 
आतंकवादियों में भय का संचार: कानून का सम्मान तब तक नहीं होता जब तक उसका डर न हो। ऑपरेशन सिंदूर ने उन आंतकी तत्वों के मन में खौफ पैदा किया है जो महिलाओं को केवल वस्तु समझते थे और भारत के सिंदूर  की ताकत को कम आंककर देखते थे। यह उनको कड़ा संदेश देता है कि अब उनकी खैर नहीं।
 
त्वरित न्याय और समाधान: अक्सर अंतराष्ट्रीय कानूनी दांव-पेंच में न्याय मिलने में सालों लग जाते हैं। लेकिन इस ऑपरेशन के माध्यम से त्वरित कार्रवाई की गई है, जिससे पीड़ित परिवारों का विश्वास व्यवस्था पर पुनः बहाल हुआ है और देश का सीना भी गर्व से चौड़ा हुआ।
 
नारी की गरिमा की रक्षा: 'सिंदूर' हमारी संस्कृति में सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक है। इस ऑपरेशन का नाम ही इसकी मंशा स्पष्ट करता है—उन हाथों को रोकना जो किसी की मर्यादा और भविष्य को उजाड़ने का प्रयास करते हैं।
 
गणतंत्र की असली सार्थकता: एक राष्ट्र तभी स्वतंत्र और गणतंत्र कहलाता है जब उसकी आधी आबादी महिलाएं के साथ उसका पतिनिडर होकर आधी रात को भी सड़क पर चल सकें। देश के किसी भी कोने में घूम सकें। ऑपरेशन सिंदूर उस दिशा में एक बड़ा और साहसी कदम है।
 
मेरे विपक्षी साथी कह सकते हैं कि यह सख्त कदम है, लेकिन मैं पूछना चाहता हूँ—क्या कोमल व्यवहार से क्रूर अपराध रोके जा सकते हैं? क्या राक्षसों का वध करना नाजायज है? प्रभु श्रीराम ने भी तो यही किया था।
 
बिच्छू का स्वभाव डंक मारना है, और व्यवस्था का धर्म उस डंक से समाज को बचाना है। जब सभ्यता पर प्रहार हो, तो 'ऑपरेशन' अनिवार्य हो जाता है।
 
निष्कर्ष: अंत में, मैं बस इतना ही कहूँगा कि ऑपरेशन सिंदूर वह कवच है जिसने देश की अस्मिता, मुस्कान और परिवारों के गौरव को बचाया है। गणतंत्र दिवस पर हम संकल्प लें कि हम ऐसे हर अभियान का समर्थन करेंगे जो हमारी माताओं-बहनों सहित देश के हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करता हो।
 
"जहाँ नारी सुरक्षित है, वहीं गणतंत्र का सूर्य उदय होता है।"
 
धन्यवाद! जय हिन्द, जय भारत।
 

भाषण को और दमदार बनाने के कुछ सुझाव:

बॉडी लैंग्वेज: बोलते समय आँखों में आत्मविश्वास रखें और हाथों के संकेतों का प्रयोग करें।
उतार-चढ़ाव: "सावधान!" या "अब उनकी खैर नहीं" जैसे वाक्यों पर अपनी आवाज़ में थोड़ा जोश और गंभीरता लाएं।
स्थानीय संदर्भ: यदि आपके क्षेत्र में इस ऑपरेशन से जुड़ी कोई विशेष सफलता की कहानी है, तो उसका एक लाइन में जिक्र ज़रूर करें।

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