Hanuman Chalisa

क्या शिव के मस्तक पर विराजित चंद्रमा का रहस्य छुपा है कैलाश पर्वत में?

अनिरुद्ध जोशी
Symbolic pic
पुराणों अनुसार देव और दानवों द्वारा किए गए सागर मंथन से जो 14 रत्न निकले थे उनमें से एक चंद्रमा भी थे जिन्हें भगवान शंकर ने अपने सिर पर धारण कर लिया था। अब सवाल यह उठता है कि क्या शिव के मस्तक पर विराजित चंद्रमा का रहस्य छुपा है कैलाश पर्वत में? यह एक सवाल है। दरअसल, हिन्दू धर्म में बहुत सारे रहस्य छुपे हैं जिनका वैज्ञानिक अर्थ खोजना जरूरी है। आओ इसका उत्तर ढूंढते हैं।
 
 
धरती का केंद्र-
धरती के एक ओर उत्तरी ध्रुव है, तो दूसरी ओर दक्षिणी ध्रुव। दोनों के बीचोबीच स्थित है हिमालय। हिमालय का केंद्र है कैलाश पर्वत। वैज्ञानिकों के अनुसार यह धरती का केंद्र है। यह एक ऐसा भी केंद्र है जिसे एक्सिस मुंडी (Axis Mundi) कहा जाता है। एक्सिस मुंडी अर्थात दुनिया की नाभि या आकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव का केंद्र। यह आकाश और पृथ्वी के बीच संबंध का एक बिंदु है, जहां दसों दिशाएं मिल जाती हैं। जब कैलाश शिखर पर सूर्य की किरणें पड़ती है तो यह अद्भुत रूप से स्वर्ण के समान चमकने लगता है और जब चंद्र की किरणें पड़ती है तो यह पर्वत पूर्णत: चांदी जैसा दिखाई देने लगता है। 

ALSO READ: चंद्र ग्रह का ज्योतिष और हिन्दू धर्म में क्या इतिहास रहा है?
केंद्र के ऊपर है चंद्रलोक-
यदि आप कैलाश पर्वत को साक्षात भगवान शिव मानते हैं तो इसके ठीक ऊपर चंद्रलोक है और ठीक नीचे पाताल लोक है। आपको यहां से पूर्णिमा की रात को चंद्रमा इस तरह दिखाई देगा जैसा कि बस कुछ ही दूरी पर स्थित हो। उसी तरह का चंद्रमा आपको कन्या कुमारी से भी दिखाई देगा। कर्क राशि का स्वामी चंद्र एक राशि में सवा दो दिन रहता है। चंद्रमा और धरती की दूरी लगभग 384,400 km है।
 
Symbolic pic
धर्मशास्त्रों अनुसार पितरों का निवास चंद्रमा के उर्ध्वभाग में माना गया है। यह आत्माएं मृत्यु के बाद एक वर्ष से लेकर सौ वर्ष तक मृत्यु और पुनर्जन्म की मध्य की स्थिति में रहते हैं। सूर्य की सहस्त्रों किरणों में जो सबसे प्रमुख है उसका नाम 'अमा' है। उस अमा नामक प्रधान किरण के तेज से सूर्य त्रैलोक्य को प्रकाशमान करते हैं। उसी अमा में तिथि विशेष को चंद्र (वस्य) का भ्रमण होता है, तब उक्त किरण के माध्यम से चंद्रमा के उर्ध्वभाग से पितर धरती पर उतर आते हैं इसीलिए श्राद्ध पक्ष की अमावस्या तिथि का महत्व भी है।
 
 
राक्षस झील है चंद्राकार-
भगवान शंकर के निवास स्थान कैलाश पर्वत के पास स्थित है दो मानसरोवर। यहां 2 सरोवर मुख्य हैं- पहला, मानसरोवर जो दुनिया की शुद्ध पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार सूर्य के समान है। दूसरा, राक्षस नामक झील, जो दुनिया की खारे पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार चन्द्र के समान है। ये दोनों झीलें सौर और चन्द्र बल को प्रदर्शित करती हैं जिसका संबंध सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा से है। जब दक्षिण से देखते हैं तो एक स्वस्तिक चिह्न वास्तव में देखा जा सकता है। यह अभी तक रहस्य है कि ये झीलें प्राकृतिक तौर पर निर्मित हुईं या कि ऐसा इन्हें बनाया गया?
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

क्या भारत में बना था ईसा मसीह के कफन का कपड़ा? DNA रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

April Monthly Horoscope 2026: अप्रैल 2026 मासिक राशिफल: जानिए कैसे बदलेंगे आपके जीवन के हालात इस महीने

मंगल का मीन राशि में गोचर: जानें 12 राशियों पर क्या होगा असर

मंगल-शनि की युति से बनेगा ज्वालामुखी योग, दुनिया में हो सकती हैं ये 5 बड़ी घटनाएं

यहूदी, ईसाई और मुस्लिम धर्म की भविष्‍वाणी: क्या यही है 'कयामत' की लड़ाई?

सभी देखें

धर्म संसार

साल 2026 में परशुराम जयंती कब मनाई जाएगी?

07 April Birthday: आपको 7 अप्रैल, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 7 अप्रैल 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

बुध का मीन राशि में गोचर, क्या होगा 12 राशियों पर इसका असर

Fengshui Tips: फेंगशुई: इन 3 बदलावों से घर में आएगा पैसा ही पैसा

अगला लेख