Dharma Sangrah

Mahakal ki sawari: उज्जैन महाकाल सवारी में कितने रूप में दर्शन देते हैं भोले बाबा?

WD Feature Desk
शनिवार, 20 जुलाई 2024 (11:31 IST)
Ujjain mahakal sawari 2024: इस वर्ष 2024 में महाकाल की नगरी उज्जैन में सावन में 5 और भादो मास में 2 बाबा महाकालेश्वर की सवारी निकलेगी। प्रथम सवारी 22 जुलाई 2024 को निकलेगी और अंतिम शाही सवारी 2 सितम्बर को निकाली जाएगी। कुल 7 सवाली निकलेगी सभी सवारी में बाबा महाकाल अलग अलग रूप रंग में विराजमान होंगे।ALSO READ: Mahakal ki Shahi sawari: उज्जैन महाकाल की शाही सवारी कब है?
  
2024 में कब-कब निकलेगी महाकाल सवारी:- 
पहली सावारी : सोमवार 22 जुलाई।
द्वितीय सवारी : सोमवार 29 जुलाई।
तृतीय सवारी : सोमवार 5 अगस्त।
चतुर्थ सवारी : सोमवार 12 अगस्त।
पंचम सवारी : सोमवार 19 अगस्त को श्रावण महीने में निकाली जाएगी।
षष्टम सवारी : सोमवार 26 अगस्त।
शाही सवारी : सोमवार 2 सितम्बर को निकाली जाएगी।
Ujjain mahakal sawari 2024
1. उमा महेश : इस स्वरूप में भगवान महाकाल उमा महेश स्वरूप में नंदी पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। उमा यानी पार्वती और महेश यानी शिव। इस रूप में शिव और शक्ति का रूप प्रकट होता है। माता की पूजा के बगैर शिव की आराधना अधूरी ही समझो।
 
2. मन महेश : मन को मोहने वाला यानी मन महेश। पालकी में विराजमान महाकाल का यह रूप सच में ही मन को मोह लेता है। इस रूप में नगर भ्रमण करके बाबा भक्तों को दर्शन देते हैं। ALSO READ: उज्जैन महाकाल की भस्म आरती के 10 सीक्रेट जो आप नहीं जानते होंगे
 
3. चंद्र मौलेश्वर : भगवान शिव के सिर पर वक्री एवं अर्ध चंद्रमा विराजमान है। इस रूप में भगवान का चंद्र स्वरूप दर्शाया जाता है। इसीलिए इसे चंद्र मौलेश्वर कहते हैं। इस रूप में उनके सिर पर बड़ा सा चंद्र लगा होता है। सबसे पहले चंद्रमा ने ही शिवजी की आराधना करके धरती पर शिवलिंग की स्थापना की थी। चंद्र एक नाम सोम भी है। सोमनाथ में उन्होंने शिवलिंग स्थापित करके पूजा की थी।
 
4. शिव तांडव : शिवजी इस रूप में गरुड़ रथ पर सवार होकर अपने तांडव रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। गरुड़ रथ पर सवार भगवान शिव वैष्णव और शैव संप्रदाय में समन्वय के प्रतीक हैं।
 
5. सप्तधान : सनातन हिंदू शास्त्रों के अनुसार हमारा शरीर 7 प्रकार की धातुओं से मिलकर बना है। इस रूप में शिवजी का मुखाविंद सात धातुओं से बनाया जाता है। इसीलिए इसे सप्तधान स्वरूप कहते हैं। यह रूप जीवन की उपत्ति को दर्शाता है।
 
6. घटाटोप : घटाटोप का अर्थ बादलों में छाई हुई काली घटाओं से हैं। शिवजी के तांडव नृत्य के दौरान जब उनकी जटाएं खुलती हैं, तो यह आकाश में काली घटाएं छाने का आभास कराती हैं। इस स्वरूप को कला से संबंधित भी माना जाता है।  ALSO READ: उज्जैन महाकाल की सवारी का रोचक इतिहास
 
7. होलकर : भगवान शिव का यह स्वरूप इंदौर के होलकर राजवंश द्वारा महाकाल मंदिर को दिया गया था। तभी से यह मुखाविंद चला आ रहा है। कहते हैं कि यह रूप भक्तों को धर्म की राह पर चलने के साथ दान करने के लिए भी प्रेरित करता है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

कुंभ राशि में सूर्य-राहु की युति: 13 फरवरी से 'ग्रहण योग', इन 4 राशियों के लिए सावधानी का समय

Mahashivratri upay: महाशिवरात्रि पर इस बार बन रहे हैं दुर्लभ योग, रात को इस समय जलाएं दीपक

वरुण का दुर्लभ गोचर: 168 साल बाद मीन राशि में, 6 राशियों पर पड़ेगा गहरा असर

चार धाम यात्रा 2026 रजिस्ट्रेशन जरूरी, यहां देखें स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

Venus Transit in Aquarius: 12 राशियों का भविष्य बदलेगा, जानिए राशिफल

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (15 फरवरी, 2026)

15 February Birthday: आपको 15 फरवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 15 फरवरी 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

Weekly Horoscope (16 To 22 Feb): फरवरी 2026 का साप्ताहिक राशिफल, अपने सितारों से जानें नए सप्ताह का हाल

फाल्गुन अमावस्या: पितरों के आशीर्वाद से बदल सकता है आपका भाग्य, जानिए सही विधि

अगला लेख