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हिंदू पुराण, ज्योतिष, नास्त्रेदमस, बाबा वेंगा और भविष्‍य मालिका की 6 कॉमन भविष्यवाणियां

वेबदुनिया फीचर टीम
शुक्रवार, 27 मार्च 2026 (09:39 IST)
विभिन्न पौराणिक ग्रंथों, नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों, बाबा वेंगा के कथनों और आधुनिक ज्योतिषीय गणनाओं का विश्लेषण करने पर 6 ऐसी बातें निकलकर आती हैं जो इन सभी में 'कॉमन' या एकसमान हैं। यह इस बात का संकेत है कि दुनिया एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। यहाँ श्लोक और तर्कों के साथ उनका विवरण दिया गया है।
 

1. प्राकृतिक प्रलय और जल का साम्राज्य

पुराणों से लेकर नास्त्रेदमस तक, सभी ने माना है कि अंत समय में प्रकृति का संतुलन बिगड़ेगा। कहीं पानी के लिए युद्ध होगा तो कहीं बेमौसम बारिश और अकाल पड़ेगा। पुराणों से लेकर भविष्य मालिका तक, सभी ने माना है कि पृथ्वी का भौगोलिक स्वरूप बदल जाएगा। जगन्नाथ पुरी के मंदिर की सीढ़ियों तक समुद्र का पानी आने की बात 'मालिका' में प्रमुख है।
 
भविष्य मालिका का कथन:
"समुद्र माड़ि आसिबो, नीलाचलु पाहाच छुइबो।"
(अर्थ: समुद्र आगे बढ़ेगा और पुरी मंदिर की 22वीं सीढ़ी तक पानी आ जाएगा।)
 
नास्त्रेदमस/बाबा वेंगा: दोनों ने समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और विशाल सुनामी के जरिए तटीय शहरों के डूबने की भविष्यवाणी की थी। दोनों ने भविष्यवाणी की थी कि 21वीं सदी के मध्य तक पीने के पानी की भारी किल्लत होगी और समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कई शहर डूब जाएंगे।
 
श्रीमद्भागवत महापुराण, द्वादश स्कन्ध, द्वितीय अध्याय
अनावृष्ट्या विनङ्क्ष्यन्ति दुर्भिक्ष भय पीडिताः।
शीत-वातातप-प्रावृड्-हिमैर अन्योन्यतः प्रजाः ॥ १०॥
अर्थ: अनावृष्टि (सूखे) के कारण लोग भूख से तड़पेंगे। मौसम इतना अनिश्चित होगा कि लोग अत्यधिक ठंड, हवा और धूप को सहने को मजबूर होंगे।
 

2. भीषण युद्ध और 'तीन दिन का अंधेरा'

पुराण, भविष्य मालिका और नास्त्रेदमस, दोनों ने ही एक ऐसे भीषण युद्ध (तीसरे विश्व युद्ध) की बात की है जो दुनिया की आबादी को काफी कम कर देगा।
 
भविष्य मालिका: अच्युतानंद जी ने लिखा है कि एक समय ऐसा आएगा जब आकाश में दो सूर्य दिखाई देंगे (संभवतः कोई धूमकेतु या परमाणु विस्फोट) और पृथ्वी पर 3 दिन तक अंधेरा छा जाएगा।
नास्त्रेदमस: उन्होंने 'तीसरे एंटी-क्राइस्ट' के उदय और 27 साल चलने वाले एक भीषण वैश्विक संघर्ष की बात की है।
बाबा वेंगा: उन्होंने भी 21वीं सदी में बड़े देशों के बीच परमाणु संघर्ष की चेतावनी दी थी।
 

3. अधर्म का चरम और शासकों का पतन

सभी भविष्यवक्ता सहमत हैं कि अंत समय में सत्ता उन लोगों के पास होगी जिनके मन में दया और धर्म नहीं होगा। सभी भविष्यवक्ताओं ने एक सुर में कहा है कि कलयुग के चरम पर सत्ता उन लोगों के हाथ में होगी जो जनता का भला करने के बजाय अपनी जेब भरेंगे।
 
श्रीमद्भागवत पुराण का श्लोक
लुब्धाः पापकृतोऽतीव दुःशीला धर्मवर्जिताः।
अर्थ: शासक लालची, पापी, दुराचारी और धर्महीन हो जाएंगे।
 
अविद्यया च दम्भेन सत्यं चैवानृतं तथा।
तपसा च शमेनैव सर्वे लोकेषु भूभुजः॥
अर्थ: पाखंड, झूठ और अविद्या के बल पर लोग शासन करेंगे। राजा (नेता) प्रजा की रक्षा करने के बजाय उनका शोषण करेंगे।
 
भविष्य मालिका: इसमें लिखा है कि शासन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी, कानून का डर खत्म होगा और लोग अपनों के ही खून के प्यासे होंगे।
नास्त्रेदमस: उन्होंने 'तीन एंटी-क्राइस्ट' (अधर्मियों) की बात की है, जो दुनिया को अराजकता की ओर ले जाएंगे।
 

4. असाध्य रोग और वायु का विषाक्त होना

पुराणों और आधुनिक भविष्यवक्ताओं दोनों ने ही संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसी बीमारियां आएंगी जिनका इलाज विज्ञान के पास भी तुरंत नहीं होगा वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद नए और रहस्यमयी रोगों का उदय होगा, जिससे बचना कठिन होगा।
 
भविष्य मालिका: मालिका में स्पष्ट उल्लेख है कि ऐसी बीमारियां आएंगी जिनमें चलते-फिरते लोग मृत्यु को प्राप्त होंगे और लाशें उठाने वाले लोग भी नहीं मिलेंगे।
 
बाबा वेंगा: उन्होंने भी बर्फ में दबे किसी प्राचीन और घातक वायरस के पुनर्जीवित होने की बात कही थी। उन्होंने साइबेरिया में दबे हुए एक प्राचीन वायरस के फिर से उभरने और नई वैश्विक महामारी की चेतावनी दी थी।
 
भविष्य पुराण: इसमें वर्णन है कि कलयुग के अंत में हवा और जल प्रदूषित हो जाएंगे, जिससे नई तरह की महामारियां (Epidemics) जन्म लेंगी जो पल भर में लाखों लोगों को लील लेंगी।
 

5. कल्कि अवतार और 'नूतन सत्य युग' का उदय

सभी डरावनी भविष्यवाणियों के अंत में एक दिव्य शक्ति के उदय की बात कॉमन है, जो भारत की भूमि से पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करेगी।
 
कल्कि पुराण/श्रीमद्भागवत पुराणम् 12वें स्कंद के अनुसार 12.2.8
शम्भल ग्राम मुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः।
भवने विष्णुयशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति॥
 
भविष्य मालिका: संत अच्युतानंद जी के अनुसार, भगवान जगन्नाथ ही कल्कि रूप में प्रकट होकर दुष्टों का संहार करेंगे और भक्तों की रक्षा करेंगे। इसके बाद 1000 साल का 'सत्य युग' शुरू होगा।
 
नास्त्रेदमस और एडगर कायसी: नास्त्रेदमस ने एक 'महान चाइरेन' (Chyren) और कायसी ने भारत की ओर इशारा करते हुए एक ऐसे आध्यात्मिक नेतृत्व की बात की है जो पूरी दुनिया को शांति का मार्ग दिखाएगा। उन्होंने 'पूरब के एक महान नेता' के बारे में लिखा है, जो अपने ज्ञान और शक्ति से दुनिया में शांति स्थापित करेगा।
 

6. रिश्तों में दरार और कम आयु

मनुष्य के शरीर का क्षरण और आपसी प्रेम का अंत भी एक साझा भविष्यवाणी है।
श्रीमद्भागवतपुराणम्/स्कन्धः 12/अध्यायः 2
दूरे वार्ययनं तीर्थं लावण्यं केशधारणम्।
उदरंभरता स्वार्थः सत्यत्वे धार्ष्ट्यमेव हि ॥ ६ ॥
(अर्थ: लोग केवल अपना पेट भरने को ही पुरुषार्थ मानेंगे। सत्य बोलना कमजोरी माना जाएगा और मनुष्य की आयु घटकर बहुत कम रह जाएगी।)
 
नास्त्रेदमस: उन्होंने लिखा था कि माता-पिता और संतान के बीच का बंधन टूट जाएगा और लोग अपनों के ही खून के प्यासे होंगे।
Edited : Anirudh Joshi

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