कविता : तुमको ये मेरा नमन आखिरी है

आत्माराम यादव 'पीव'
सजदे करता था मैं श्रीराम तुमको
हंसके कह देते थे तुम अपने गम को
नहाने को गए तुम जब मुलाकात करके
जुदा हो गए सदा के लिए न लाए रूह तन में
जीवन में चले थे तुम मदमस्त होकर
पर जिंदगी की शाम ये तुम्हारी आखिरी है।
 
भले ही चले थे तुम ठुकरा के दुनिया को
जिंदगी को ठुकराने का ये तुम्हारा मुकाम आखिरी है 
नर्मदा स्नान कर जान देने चले तुम 
जिंदगी में तुम्हारा ये स्नान आखिरी है
अपनी तरफ से मैं नमन करता हूं
तुम्हें भी मौसाजी/ श्रीराम ये मेरा नमन आखिरी है। 
 
लगे रहे तुम परहित में, परहित न घर का कर सके
दिल टटोला करती दुनिया तेरा, दाता बन तुम देख न सके
सूरतें देखी लाख तूने, पर दाग न देखे खुद के सीने में
ये कैसा चस्का लगा रहा तुमको, खुद घर को अपने भूल गए।
 
धन-दौलत का गरूर तेरा, पर तन-मिट्टी ने न साथ दिया
मौत की आंधी से टकराकर, ये जिस्म इमारत खाक हुई
30 अगस्त 1993 को, जीवन का ये पड़ाव आखिरी है
तन मिल गया पंचतत्व में, धरती पर तेरा ये मुकाम आखिरी है 
मेरी तरफ से नमन तुम ले लो, श्रीराम को ये मेरा नमन आखिरी है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

चैत्र नवरात्रि 2025: नवरात्रि में कम करना चाहते हैं वजन, तो भूलकर भी ना खाएं ये 6 चीजें

गुड़ी पड़वा पर क्यों खाई जाती है कड़वी नीम और गुड़, जानिए सेहत को मिलते हैं क्या फायदे

डायबिटीज-कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकते हैं नवरात्रि व्रत में खाए जाने वाले ये 7 सुपर फूड, सेहत को मिलते हैं अनगिनत फायदे

Chaitra navratri diet: नवरात्रि में कैसे रखें अपनी सेहत का ख्याल? जानें सही डाइट टिप्स

चैत्र नवरात्रि में घर के वास्तु दोष दूर करने के लिए करिए ये सरल उपाय, मां दुर्गा की बरसेगी कृपा

सभी देखें

नवीनतम

सीधे किडनी पर वार करता है क्रिएटिनिन, जानिए बॉडी में क्रिएटिनिन बढ़ने से क्या होता है?

चैत्र नवरात्रि में कौन सा रंग पहनें? जानें 9 दिन के 9 रंगों का शुभ महत्व

क्यों नहीं खाने चाहिए तुलसी के पत्ते चबाकर, जानिए क्या कहता है विज्ञान

रमजान के आखिरी जुमा मुबारक के साथ अपनों को दें ये खास संदेश

रोजाना एक कटोरी दही खाने के सेहत को मिलते हैं ये फायदे

अगला लेख