rashifal-2026

कविता : बचपन

संजय वर्मा 'दृष्ट‍ि'
जिंदगी की दौड़ भाग में
खो सा गया मेरा बचपन
बेफिक्र मौज मस्ती वाला
मेरा राज दुलारा बचपन
माँ के आँचल में छुपजाना
नजर उतारने वाला बचपन
भले ही माँ भूखी हो मगर
मुझे तृप्ति कराने वाला बचपन 
आज क्यों खो सा गया या
मै बचपन को पीछे छोड़ आया 
याद आते बचपन के दोस्त 
उनके संग खेलना बतियाना 
न जाने मेरे दोस्त कहा होंगे? 
बस एलबम के पैन उलट कर 
बचपन की यादों को ताजा कर लेता 
दूर जाने से उन्हें याद कर लेता 
और उन्हें आने लगती हिचकियाँ 
कौन याद कर रहा होगा सोचकर 
उम्र उनकी और मेरी उम्र ढल जाती 
सोचता गांव जाऊ उनसे मिलू 
बीते बचपन को फिर से पाऊं
किसी से पूछा तो उनका एक ही जवाब 
उनको गुजरे तो कई साल हो गए 
आँखों में रुलाने वाला बचपन आगया 
व्यस्तम जिंदगी के दो पल तो निकालना 
अपने बचपन के यादों के मनन लिए 
जिंदगी की रप्तार बड़ी तेज होती 
बचपन का सुकून छीन ले जाती हमसे 
और हमें ढूंढने पर भी नहीं मिलता 
हमारा प्यारा सा बचपन और हमारे साथी

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Traditional Punjabi Recipe: कैसे बनाएं पारंपरिक पंजाबी भोजन सरसों का साग और मक्के की रोटी

मेंटल हेल्थ स्ट्रांग रखने के लिए रोजाना घर में ही करें ये 5 काम

Health Benefits of Roasted Potatoes : भुने आलू खाने से हेल्थ को मिलते हैं ये 6 सेहतमंद फायदे

एक दिन में कितने बादाम खाना चाहिए?

एक आकाशीय गोला, जो संस्कृत मंत्र सुनते ही जाग जाता है

सभी देखें

नवीनतम

रहस्य से पर्दा उठा, आकाशीय बूगा गोला कुंजी है क्वांटम विज्ञान की

हर्निया सर्जरी का मतलब व्यायाम पर रोक नहीं: डॉ. अचल अग्रवाल

ध्यान की कला: स्वयं की खोज की ओर एक यात्रा

World Meditation Day: ध्यान साधना क्या है, कैसे करें शुरू? जानें महत्व

Solstice 2025: 21 दिसंबर साल का सबसे छोटा दिन, जनिए 5 दिलचस्प बातें

अगला लेख