shiv chalisa

कविता : मोहे हर जनम बिटिया ही कीजो

डॉ. निशा माथुर
मोहे हर जनम बिटिया ही कीजो,
वही मेरे बाबुल का आंगन दीजो,
वही नीम छैयां सा कानन दीजो,
भीगता था जहां प्यारा-सा बचपन,
वही मेरे सपनों का सावन दीजो!!
 
वही मां ममता की मूरत दीजो,
वही अम्मा की भोली सूरत दीजो, 
छुपा लेती थी जो मुझे पलकों में, 
वही मां के चरणों का तीरथ दीजो!!
 
वही बहनों की अठखेलियां दीजो,
वही मेरी सखी सहेलियां दीजो,
बातों की राजेदारी होती थी जिनसे,
वही शक्ल बहना की हूबहू दीजो!!
 
वही भइया की मुस्कान दीजो,
वही मेरे पीहर का मान दीजो,
डोली में बैठा के जो करे विदा,
उस भैया के कंधों में जान दीजो,
 
वही मेरा छोटा-सा मकान दीजो,
वही जुगाड़पंती का सामान दीजो, 
छोटी-छोटी बातें छोटी-सी खुशियां 
वही मेरे शहर का आबोदाना दीजो,
 
वही मेरे साजन का द्वार दीजो,
वही सारे सोलह श्रृंगार दीजो, 
खुद के वजूद पर इतरा जाऊं,
वही गलबहियों के हार दीजो।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

क्या एक पुत्र भी गुरु हो सकता है? माता देवहूति का अद्भुत जीवन

Low Blood Sugar: हाइपोग्लाइसीमिया, बॉडी में शुगर कम होने पर क्या लक्षण महसूस होते हैं?

Indian Gooseberry: आंवला का जादू: रोज एक आंवला खाने से बालों और आंखों में होंगे ये 7 बड़े बदलाव

मृत्युपूर्व चेतना के लौटने का चमत्कार

बहुत ज्यादा सोचते हैं (Overthinking)? दिमाग को शांत और खुश रखने के लिए रोज करें ये 7 आसान योगासन

सभी देखें

नवीनतम

टी-20 मैच की तरह बेखौफ खेलें ज़िंदगी की दूसरी पारी

खामेनेई का अंत और इस्लामी क्रांति

Shitala Mata Bhog: बसोड़ा पर्व, शीतला माता भोग के 7 विशेष व्यंजन

पहले ही लिखी जा चुकी थी मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार की विदाई की पटकथा

विश्व महिला दिवस 2026: महिला सुरक्षा से जुड़ी ये 4 अहम बातें हर किसी को जानना जरूरी

अगला लेख