suvichar

एक पाती वृक्ष की : लघुकथा

ज्योति जैन
आज के बूफे के दौर से कुछ वर्षों पीछे जाकर यदि सोच सकें तो सहभोज की पंगत याद कर लीजिए.....। 
 
जी हां... पंगत की याद आते ही आपको याद आ जाऐंगे पत्तल- दोने...।.बस...! मैं वही खाखरे का वृक्ष हूं, जो पत्तल-दोने के लिए पत्ते देता हूं..। मैं  छोटे-बड़े दोनों ही रुप में मिल जाता हूं..।तेज गर्मी, पथरीला इलाका जो भी हो,मुझे विचलित नहीं करते...। पता है...?गाय और अन्य जानवर भी मेरे पत्ते नहीं  खाते..,तभी तो मैं हरा भरा ही बना रहता हूं.।
गावों के लिए तो आज भी मेरी उपयोगिता है....लेकिन शहरी इलाके तो मुझे भूलते ही जा रहे हैं...,यही मेरी पीड़ा है...।
 
 
तो जब महानगर उन्नति/प्रगति की बात करते हैं तो मै यही चाहूं गा कि भोजन के लिए डिस्पोजेबल की जगह पुनः मेरे पत्तों के पत्तल-दोने चलन में आ जाएं... ताकि पर्यावरण व पृथ्वी, दोनों की रक्षा हो सके..।
 
हर वृक्ष की व्यथा होती है कि मुझे मत उखाड़ो...मुझे मत नोचो..मुझे मत तोड़ो...
 
मगर मैं कहता हूं., आओ....मुझे तोड़ लो...मेरे पत्ते ले जाओ....परमार्थ का मेरा यही भाव है....।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

गर्मियों में आइस एप्पल खाने के फायदे, जानें क्यों कहलाता है सुपरफ्रूट

आम का रस और कैरी पना, दोनों साथ में पीने से क्या होता है?

गर्मी के दिनों में फैशन में हैं यह कपड़े, आप भी ट्राय करना ना भूलें

क्या गर्मियों में आइसक्रीम खाना बढ़ा सकता है अस्थमा का खतरा?

कैंसर शरीर में कैसे फैलता है? जर्मन रिसर्च टीम ने किया नया खुलासा

सभी देखें

नवीनतम

चैत्र नवरात्रि, गुड़ीपड़वा और चेटीचंड पर्व पर बेहतरीन हिन्दी निबंध

गुड़ीपड़वा, नवरात्रि और चेटीचंड त्योहार के 10 प्रमुख व्यंजन

LPG गैस के बिना शाकाहारी व्यंजन: 10 स्वादिष्ट और सेहतमंद चाट रेसिपी

World Tuberculosis Day 2026: विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस: जानें कारण, महत्व, लक्षण, उपचार और रोकथाम

World Water Conservation Day: विश्व जल संरक्षण दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

अगला लेख