rashifal-2026

नारी शोषण की व्यथा सुनाती कविता : आज का रावण...

शम्भू नाथ
पग-पग रावण मिलते अब तो, 
कन्याओं को हर रहे हैं, 
कुकर्म कर्म नित्य कर रहे हैं।
 
कभी भेष साधु का धरकर, 
मंडप-महल सजाते हैं।
मौका पाय हैवान वे बनते, 
दामन पर दाग लगाते हैं।
 
मीठी-मीठी बातों से अपनी, 
अबलाओं को छल रहे हैं, 
कुकर्म कर्म नित्य कर रहे हैं।
 
कभी छुपा रुस्तम बन वे, 
पीछे से बाण चलाते हैं।
उनकी चतुर चौकड़ी में फंस, 
उन्हीं को व्यथा सुनाते हैं।
 
समय देखकर हरण हैं करते, 
कलियों को कैसे मसल रहे हैं, 
कुकर्म कर्म नित्य पग-पग।
 
सब खिलाफत कर नहीं पाते, 
मन मसोस रह जाते हैं।
कुछ लोगों के डेरे पर तो, 
नेता-अफसर आते हैं।
 
अनदेखी जनता जब करती, 
तब अइसे रावण सफल रहे हैं, 
कुकर्म कर्म नित्य कर रहे हैं।

 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

बसंत पंचमी और सरस्वती प्रकटोत्सव पर रोचक निबंध Basant Panchami Essay

Typhoid In Hindi: टाइफाइड क्यों होता है, जानें कारण, लक्षण, उपचार और बचाव के उपाय

Cold weather Tips: ठंड में रखें सेहत का ध्यान, आजमाएं ये 5 नुस्‍खे

रूम हीटर के साथ कमरे में पानी की बाल्टी रखना क्यों है जरूरी? जानें क्या है इसके पीछे का साइंस

दूषित पानी पीने से होती हैं ये 11 तरह की गंभीर बीमारियां, बचकर रहें

सभी देखें

नवीनतम

बसंत पंचमी और सरस्वती प्रकटोत्सव पर रोचक निबंध Basant Panchami Essay

महाराष्ट्र की सियासत में ठाकरे ब्रांड का सूर्यास्त!, निकाय चुनाव में 40 साल बाद ढहा BMC का किला, उद्धव-राज ठाकरे की जोड़ी बेअसर

ठंड पर दोहे: आंगन में जलने लगा

बसंत पंचमी और प्रकृति पर हिन्दी में भावपूर्ण कविता: बसंत का मधुर संदेश

क्या डायबिटीज रोगी कीवी खा सकते हैं?, जानें 4 फायदे

अगला लेख