Dharma Sangrah

बाल कविता : झूठ बोलने की सजा

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
बाघ आ गया, बाघ आ गया,
कहकर चरवाहा चिल्लाया।
 
आए गांव के लोग वहां तो,
बाघ किसी ने वहां न पाया।
 
झूठ बोलकर चरवाहे ने, 
बार-बार विश्वास गंवाया।
 
किंतु बाघ जब सच में आया,
तो कोई बचाने उसे न आया।
 
झूठ बोलने वालों का तो,
हाल यही है होता आया।
 
दुनिया वालों को ऐसा यह,
काम कभी बिलकुल न भाया। 

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