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Lord Chitragupta: भगवान चित्रगुप्त प्रकटोत्सव 2026: जानिए 10 अद्भुत बातें और रहस्य

वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
बुधवार, 22 अप्रैल 2026 (16:15 IST)
Chitragupta Pooja 2026: भगवान चित्रगुप्त, यमराज के मार्गदर्शक और धर्म के सच्चे रक्षक, हमारे कर्म और न्याय के महत्व को समझाने वाले देवता हैं। उनके प्रकटोत्सव का आयोजन हर साल वैशाख शुक्ल षष्ठी को होता है, जो कि इस बार 23 अप्रैल 2026, दिन गुरुवार को मनाया जा रहा है। जबकि भाईदूज के दिन उनकी विशेष पूजा भी की जाती है।ALSO READ: Ganga Saptami: गंगा सप्तमी का क्या है महत्व, पूजा विधि और उपाय

धार्मिक मान्यतानुसार कार्तिक शुक्ल द्वितीया यानी भाईदूज और वैशाख शुक्ल षष्ठी को उनकी पूजा का विशेष महत्व है। भगवान चित्रगुप्त को हिंदू धर्म में न्याय और कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाला माना जाता है। वे अपनी दिव्य लेखनी से प्रत्येक जीव के पाप और पुण्य का हिसाब रखते हैं। यही कारण है कि उनका पूजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे जीवन में न्याय, अनुशासन और पितृ तर्पण का संदेश भी देता है। यह उत्सव कायस्थ समाज के आराध्य देव की आराधना तथा सामाजिक एकता का प्रतीक है। 
 

आइए जानते हैं भगवान चित्रगुप्त के बारे में 10 रोचक और अद्भुत तथ्य:

 

1. ब्रह्मा से हुई उत्पत्ति

 
पुराणों के अनुसार, भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति ब्रह्माजी की काया से हुई। वे ब्रह्मा के 18 मानस संतानों में से एक हैं और उन्हें महाकाल भी कहा जाता है।
 

2. कायस्थ जाति के उत्पत्ति का कारण

 
पौराणिक मान्यता अनुसार, कायस्थ जाति का निर्माण भगवान चित्रगुप्त ने किया।
 

3. यमराज के ऊपर शक्ति

 
यमराज ब्रह्मा के दशांश माने जाते हैं, लेकिन चित्रगुप्त ब्रह्मा के पुत्र हैं और अपनी तपस्या से यमराज से भी 10 गुना अधिक शक्तिशाली माने जाते हैं। वे यमराज के मार्गदर्शक हैं, केवल मुंशी नहीं।
 

4. पितृ मुक्ति में महत्वपूर्ण

 
सनातनी धर्म में पितरों की मुक्ति हेतु चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। गरूड़ पुराण भी इन्हें प्रसन्न करने के लिए पढ़ा जाता है।ALSO READ: Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी का धार्मिक महत्व, परंपरा और दान

 

5. बही 'अग्रसन्धानी'

 
उनकी बही में प्रत्येक जीव के पाप और पुण्य का विवरण लिखा है। यही कारण है कि चित्रगुप्त को कर्म के न्यायाधिकारी माना जाता है।
 

6. विवाह और परिवार

 
ब्रह्माजी ने उन्हें वैवस्वत मनु और नागों की कन्याओं से विवाह कराया। 12 पुत्रों के माध्यम से सभी प्राणियों का भाग्य लिखने और यमलोक में दण्डदाता बनने का कार्य सौंपा गया।
 

7. दंड और न्याय के रक्षक

 
भगवान चित्रगुप्त ने अनुशासन और दंड विधान का निर्माण किया। यमराज और यमदूत इनके बनाए कानून के अनुसार पाप का दंड और पुण्य का फल देते हैं।
 

8. विष्णुलोक की प्राप्ति

 
पुराणों के अनुसार, चित्रगुप्त पूजा करने से भक्त को विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
 

9. देव, दानव और ऋषियों का भाग्य

 
वे सभी जीवों के भाग्य निर्धारक हैं और लेखनी के माध्यम से न्याय सुनिश्चित करते हैं।
 

10. कायस्थ जाति की 12 शाखाएं

 
चित्रगुप्त के 12 पुत्रों के वंशानुसार कायस्थों की 12 शाखाएं बनीं। इनमें श्रीवास्तव, सूर्यध्वज, वाल्मीकि, अष्ठाना, माथुर, गौड़, भटनागर, सक्सेना, अम्बष्ठ, निगम, कर्ण और कुलश्रेष्ठ शामिल हैं।
 

जय चित्रगुप्त! 

भगवान की कृपा से ही हमारे कर्म और न्याय का मार्ग स्पष्ट होता है।
 
बता दें कि भगवान चित्रगुप्त प्रकटोत्सव के इस पावन अवसर पर भारतभर के विभिन्न स्थानों पर भव्य शोभायात्रा, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
 
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