Hanuman Chalisa

श्रीकृष्‍ण की जन्मभूमि की 5 खास बातें

अनिरुद्ध जोशी
मथुरा उत्तर प्रदेश जिले में यमुना नदी के तट पर बसा एक सुंदर शहर है। यमुना नदी के पश्चिमी तट पर बसा विश्व के प्राचीन शहरों में से एक मथुरा प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केंद्र रहा है। इस शहर का इतिहास बहुत ही पुराना है। यह शहर रामायण काल से पूर्व भी अस्तित्व में था। मध्यकाल में इस शहर को कई बार उजाड़ा, लुटा और विध्वंस किया गया परंतु यह शहर फिर से कई बार खड़ा हो गया। आओ जानते हैं यहां के श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि की खास 5 बातें।
 
 
1. पौराणिक साहित्य में मथुरा को अनेक नामों से संबोधित किया गया है जैसे- शूरसेन नगरी, मधुपुरी, मधुनगरी, मधुरा आदि। हरिवंश और विष्णु पुराण में मथुरा के विलास-वैभव का वर्णन मिलता है। यह नगरी श्रीकृष्ण की जन्मभूमि है। रोहिणी नक्षत्र तथा अष्टमी तिथि के संयोग से जयंती नामक योग में लगभग 3112 ईसा पूर्व (अर्थात आज से 5133 वर्ष पूर्व) को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था। उस काल में मथुरा पर कंस का राज था। कंस के बाद मथुरा पर राजा उग्रसेन ने शासन किया। मथुरा के आसपास वृंदावन, गोवर्धन, गोकुल, बरसाना आदि कई ऐसे गांव, कस्बे और शहर बसे हैं जो कि श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े हुए हैं। 
 
3. कथाओं के अनुसार उनके प्रपौत्र व्रजनाभ ने ही सर्वप्रथम उनकी स्मृति में केशवदेव मंदिर की स्थापना की थी। इसके बाद यह मंदिर 80-57 ईसा पूर्व बनाया गया था। इस संबंध में महाक्षत्रप सौदास के समय के एक शिलालेख से ज्ञात होता है कि किसी 'वसु' नामक व्यक्ति ने यह मंदिर बनाया था। काल के थपेड़ों ने मंदिर की स्थिति खराब बना दी। करीब 400 साल बाद गुप्त सम्राट विक्रमादित्य ने उसी स्थान पर भव्य मंदिर बनवाया। इसका वर्णन भारत यात्रा पर आए चीनी यात्रियों फाह्यान और ह्वेनसांग ने भी किया है।
 
4. तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मेगस्थनीज ने मथुरा को मेथोरा नाम नाम से संबोधित करके इसका उल्लेख किया है। 180 ईसा पूर्व और 100 ईसा पूर्व के बीच कुछ समय के लिए मथुरा पर ग्रीक के शासकों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में नियंत्रण बनाया रखा। यवनराज्य शिलालेख के अनुसार 70 ईसा पूर्व तक यह निरयंत्रण बना रहा। फिर इस पर सिथियन लोगों ने शासन किया। फिर राजा विक्रमादित्य के बाद यह क्षेत्र कुशाण और हूणों के शासन में रहा। राजा हर्षवर्धन के शासन तक यह शहर सुरक्षित रहा। इसे ज्यादा नुकमसान नहीं पहुंचा। 
 
5. ईस्वी सन् 1017-18 में महमूद गजनवी ने मथुरा के समस्त मंदिर तुड़वा दिए थे, लेकिन उसके लौटते ही मंदिर बन गए। मथुरा के मंदिरों के टूटने और बनने का सिलसिला भी कई बार चला। बाद में इसे महाराजा विजयपाल देव के शासन में सन् 1150 ई. में जज्ज नामक किसी व्यक्ति ने बनवाया। यह मंदिर पहले की अपेक्षा और भी विशाल था, जिसे 16वीं शताब्दी के आरंभ में सिकंदर लोदी ने नष्ट करवा डाला।
 
ओरछा के शासक राजा वीरसिंह जू देव बुन्देला ने पुन: इस खंडहर पड़े स्थान पर एक भव्य और पहले की अपेक्षा विशाल मंदिर बनवाया। इसके संबंध में कहा जाता है कि यह इतना ऊंचा और विशाल था कि यह आगरा से दिखाई देता था। लेकिन इसे भी मुस्लिम शासकों ने सन् 1669 ईस्वी में नष्ट कर इसकी भवन सामग्री से जन्मभूमि के आधे हिस्से पर एक भव्य ईदगाह बनवा दी गई, जो कि आज भी विद्यमान है। इस ईदगाह के पीछे ही महामना पंडित मदनमोहन मालवीयजी की प्रेरणा से पुन: एक मंदिर स्थापित किया गया है, लेकिन अब यह विवादित क्षेत्र बन चुका है क्योंकि जन्मभूमि के आधे हिस्से पर ईदगाह है और आधे पर मंदिर।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

क्या आप भी गलत तरीके से करते हैं गायत्री मंत्र का जाप? जानें सही नियम और 21 दिनों में देखें चमत्कारी बदलाव

ओवरथिंकिंग और मानसिक तनाव से थक चुका है दिमाग? आज ही आजमाएं भगवद्गीता के ये 3 लाइफ हैक्स, तुरंत मिलेगी शांति

जून माह में रहेगी ज्येष्ठ माह की 2 एकादशियां, जानिए तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

Vat Savitri Purnima 2026: वट सावित्री पूर्णिमा व्रत का महत्व, पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

जून में कर्क राशि में बनेगा गजलक्ष्मी योग, 4 राशियों को मिलेगा अचानक से धन

सभी देखें

धर्म संसार

World Environment Day 2026: वृक्ष से जुड़े हिंदू व्रत एवं त्योहार

05 June Birthday: आपको 5 जून, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 5 जून 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

Parama Ekadashi 2026: 3 साल बाद आई परमा एकादशी, इस तरह करें पूजा और व्रत

अधिकमास की भानु सप्तमी 2026 कब है? जानें तिथि, महत्व, शुभ मुहूर्त और सूर्यदेव को प्रसन्न करने के उपाय

अगला लेख