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उर्दू साहित्य
अहमद फ़राज़ की ग़ज़लें
ईद-ए-क़ुरबाँ
लेके पैग़ामे-मसर्रत आगया दिन ईद का आज सब ही ने भरी हैं क़हक़हों से झोलियाँ
मुनव्वर राना की ग़ज़लें (1)
नवाब एहसान अली बहादुर ---- इन्दौर
क्या कहें तुम से के हम हिज्र* में क्या करते हैं-------जुदाई याद इक भूलने वाले को किया करते हैं
नज़्म : 'जाने ग़ज़ल'
चाँद चेहरे को तो आँखों को कंवल लिक्खूँगा जब तेरे हुस्न-ए-सरापा पे ग़ज़ल लिक्खूँगा
त्रिमोहन की ग़ज़लें
उदास शहर में जब जब भी हँसी आती है किसी ग़रीब के चहरे पे चिपक जाती है
जोया के अशआर
ज़िन्दगी लगती है इक प्यारी ग़ज़ल सी लेकिन, इस का हर शे'र बड़ा दर्द भरा होता है।
एहसान बिन दानिश की ग़ज़लें
मैं बेअदब हुआ कि वफ़ा में कमी हुई होंटों पे क्यों है 'मोहरेख़मोशी' लगी हुई---चुप रहने की मोहर
अबरू न सँवारों कहीं कट जाए न उँगली
अबरू न सँवारों कहीं कट जाए न उँगली नादान हो तलवार से खेला नहीं करते
हज़ल : वाहिद अंसारी बुरहामपुरी
हर तरफ़ जश्न-ए-बहाराँ, हर तरफ़ रंग-ए-निशात सूना-सूना है हमारे दिल का आँगन दोस्तो
राहत इन्दौरी की ग़ज़लें
मुर्ग़, माही, कबाब ज़िन्दाबाद हर सनद हर ख़िताब ज़िन्दाबाद
तू मुझे भूल गया हो तो
अगर आने में कुछ देर हुई है तो इसकी कोई न कोई वजह ज़रूर होगी। और वजह इसके सिवा और क्या हो सकती है के क...
दिल से पहुँची तो हैं
सब ग़लत कहते थे लुत्फ़-ए-यार को वजहे-सुकूँ दर्द-ए-दिल उसने तो हसरत और दूना कर दिया-------हसरत मोहानी
क़ैसर इन्दौरी
चश्म-ए-गुल्चीं में ख़ार हैं हम लोग फिर भी जान-ए-बहार हैं हम लोग
क़तआत : रूपायन इन्दौरी
कुछ करम में कुछ सितम में बाँट दी कुछ सवाल-ए-बेश-ओ-कम में बाँट दी ज़िन्दगी जो आप ही थी क़िब्लागाह हम ...
सादिक़ की ग़ज़लें
जिस्म पर खुर्दुरी सी छाल उगा आँख की पुतलियों में बाल उगा
पड़े हैं तो पड़े रहने दो मेरे खून के धब्बे
पड़े हैं तो पड़े रहने दो मेरे खून के धब्बे तुम्हें देखेंगे सब महशर में दामां कौन देखेगा?
'है बस के हर इक उनके इशारे में निशाँ और'
उनकी जानिब से इशारे तो ज़रूर होते हैं, लेकिन उन इशारों का मतलब समझना बहुत मुशकिल है। इसलिए जब वो मोहब...
बड़े मकान की अज़मत तो ढह चुकी होगी
बड़े मकान की अज़मत तो ढह चुकी होगी चचा हज़ूर का लहजा करख्त है कि नहीं
कामिल बेहज़ादी-भोपाल
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