Hanuman Chalisa

Phulera Dooj 2026: फुलैरा दूज के दिन क्या करते हैं क्या है इसका महत्व और पूजा विधि

WD Feature Desk
गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026 (09:27 IST)
Phulera Dooj celebration 2026 : फुलैरा दूज को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और शुभ दिनों में से एक माना जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम को समर्पित है। मथुरा और ब्रज क्षेत्र में इसकी विशेष रौनक देखते ही बनती है। 'फुलैरा' का अर्थ है फूलों से सजाना या फूलों की वर्षा करना। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी पर फूलों की होली खेली जाती है। रंगों की बजाय फूलों से उत्सव मनाया जाता है। विशेष रूप से बांके बिहारी मंदिर में इस दिन भव्य पुष्प वर्षा होती है, जहां हजारों श्रद्धालु इस दिव्य दृश्य के साक्षी बनते हैं।ALSO READ: Holi: बरसाना में गड़ा होली का डांडा, ब्रज में शुरू हुआ 40 दिनों का रंग और प्रेम उत्सव
 
 
वर्ष 2026 में फुलैरा दूज 19 फरवरी (गुरुवार) को मनाई जाएगी।
 

फुलैरा दूज के दिन क्या करते हैं?

इस दिन को 'फूलों का त्योहार' माना जाता है। इस दिन मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं:
 
होली की शुरुआत: ब्रज में इसी दिन से होली के पर्व की शुरुआत मानी जाती है। लोग एक-दूसरे पर फूलों की वर्षा करते हैं।
 
अबूझ मुहूर्त: इस दिन को 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है। इसका अर्थ है कि इस दिन कोई भी शुभ कार्य, जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश करने के लिए पंडित से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती। 
 
शादी-विवाह: फाल्गुन शुक्ल द्वितीया का दिन विवाह के लिए बहुत शुभ होता है। यह साल का सबसे बड़ा शादियों का दिन होता है, क्योंकि इस दिन कोई दोष नहीं लगता। फुलेरा दूज: 
 

फुलैरा दूज का महत्व

राधा-कृष्ण का मिलन: पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान कृष्ण लंबे समय तक राधा जी से नहीं मिले, तो प्रकृति मुरझाने लगी। तब कृष्ण ने आकर राधा जी के साथ फूलों की होली खेली, जिससे प्रकृति फिर से खिल उठी। यह दिन प्रेम की विजय का प्रतीक है।
 
वसंत का स्वागत: यह दिन सर्दी की विदाई और वसंत ऋतु के आगमन का उत्सव है।
 
दोषों से मुक्ति: ज्योतिष के अनुसार, यदि किसी की कुंडली में विवाह का योग नहीं बन रहा या प्रेम संबंधों में खटास है, तो इस दिन पूजा करने से लाभ होता है।ALSO READ: Holika Dahan 2026: पूर्णिमा को है ग्रहण, कब करें होलिका दहन..!
 

फुलैरा दूज पूजा विधि

श्रृंगार: फुलैरा दूज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और राधा-कृष्ण की मूर्ति को सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाएं।
 
फूलों का अर्पण: राधा-कृष्ण को ताजे और सुगंधित फूलों विशेषकर गेंदा और गुलाब से सजाएं। उन्हें फूलों का बंगला समर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
 
अबीर-गुलाल: पूजा के दौरान राधा-कृष्ण के चरणों में थोड़ा सा गुलाल अर्पित करें, जो आने वाली होली का प्रतीक है।
 
मंत्र जाप: पूजा के समय 'ॐ राधाकृष्णाय नमः' या 'राधे-राधे' का जाप करें।
 
भोग: इस दिन भगवान को पोहा, सेवइयां या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाया जाता है।
 

फुलैरा दूज- FAQs

 
1. फुलैरा दूज क्या है?
फुलैरा दूज एक हिंदू पर्व है जो फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से राधा-कृष्ण को समर्पित है और होली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
 
2. फुलैरा दूज कहां विशेष रूप से मनाई जाती है?
यह पर्व खास तौर पर बरसाना और वृंदावन में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
 
3. फुलैरा दूज का धार्मिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि इस दिन राधा और कृष्ण फूलों की होली खेलते हैं। इसे अत्यंत शुभ दिन माना जाता है, इस दिन बिना मुहूर्त के भी विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।
 
4. फुलैरा दूज का आध्यात्मिक संदेश क्या है?
यह पर्व प्रेम, सौहार्द और भक्ति का प्रतीक है। यह सिखाता है कि जीवन में रंग, आनंद और सकारात्मकता बनाए रखनी चाहिए।
 
5. फुलैरा दूज पर क्या किया जाता है?
 
* मंदिरों में फूलों की वर्षा की जाती है
* राधा-कृष्ण की विशेष पूजा होती है
* भजन-कीर्तन और संकीर्तन आयोजित होते हैं
* श्रद्धालु फूलों से होली खेलते हैं

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: कुंभ राशि में मंगल और राहु से बनेगा अंगारक योग, इन 5 राशियों के लिए अग्निपरीक्षा का समय

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

अधिकमास 2026: क्यों माना जाता है सबसे पवित्र महीना? जानें पूजा विधि, मंत्र और 6 खास बातें

वास्तु टिप्स: खुशहाल घर और खुशहाल जीवन के 10 सरल उपाय vastu tips

सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश से बदलेंगे वैश्विक हालात? जानें भविष्यफल

सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश, जानें मेष से मीन तक किसे मिलेगा लाभ, राशिफल

घर में रात में चमगादढ़ घुसने के हैं 6 कारण, भूलकर भी न करें नजरअंदाज, तुरंत बरतें ये सावधानियां

सभी देखें

धर्म संसार

Weekly Horoscope May 25 to 31: साप्ताहिक राशिफल 2026, हर राशि के लिए क्या लेकर आ रहा है नया सप्ताह

Bakrid 2026: मुस्लिम लोग बकरीद क्यों मनाते हैं?

शनि-केतु का बड़ा खेल: 25 नवंबर तक इन 5 राशियों पर मेहरबान रहेंगे कर्मफल दाता, बदल जाएगी तकदीर

Guru Pradosh Vrat 2026: शिव और देवगुरु की बरसेगी असीम कृपा! जानें गुरु प्रदोष व्रत का महत्व और चमत्कारी लाभ

गंगा दशहरा विशेष: रोंगटे खड़े कर देगी गंगा आरती की ये 5 अलौकिक बातें, जानकर रह जाएंगे दंग

अगला लेख