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काव्य-संसार
मशाल जलती रहनी चाहिए
श्वेत-पीत चंपा
गीली ओंस बूंद
कोमल सर्दी की गुलाबी ठिठुरन
कोमल सर्दी की गुलाबी ठिठुरन में नर्म शॉल के गर्म एहसास को लपेटे तुम्हारी नीली छुअन याद आती है, याद ज...
पूरे चांद की आधी रात
रामधारीसिंह 'दिनकर' की कविता : पुनर्जन्म
जन्म लेकर दुबारा न जनमो, तो भीतर की कोठरी काली रहती है। कागज चाहे जितना भी चिकना लगाओ, जिन्दगी की कि...
प्यार का एहसास
अपना घर
मेरा सांवला रंग
इतना भी सांवला नहीं था मेरा रंग कि चढ़ जाए मुझसे उतर कर मेरे घरवालों के मन पर, पर ऐसा हुआ जब तुमने ब...
नए साल का शोर है...
मत फूलना अमलतास
इस गर्मी में मत फूलना दमकते अमलतास मेरे मन के कच्चे आंगन में कि मैं नहीं करती अब किसी को याद, चंपा, ...
तुम्हारी यादों की पुरवाई
हां, अब बंद कर दी हैं मैंने अपने खयालों की वह खिड़की, जो लाती थी रोज रात को तुम्हारी यादों की पुरवाई...
स्वागत है नववर्ष तुम्हारा
नूतन वर्षाभिनंदन
सौंधी सच्ची आंच हूं
बेजान इन पत्थरों में
नदी के इस तट पर बिखरे,बेजान इन पत्थरों में भी,अपनापन लगता है। शहर से दूर,इस अजनबी जगह पर एक समां सुह...
बेटी पर कविता : लता कहां से लाओगे
बेटी पर कविता : वंश पनपता बेटी से
हर माता-पिता को अपनी बेटी पर बहुत गर्व होता है। प्यारी बेटी पलकों में पली, सांसों में बसी मां की आस ...
एक दिन तो जिऊं
एक दिन तो जिऊं अपने मन का रात देखे सपने के साथ सुबह मुस्कराकर जागूं और दिन के किसी खाली कोने में खुल...
वह पिता होता है...
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