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आज तुम याद बेहिसाब आए
तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं ------फ़ैज़
इस बदलते दौर में
इस बदलते दौर में जो कुछ भी हूँ मैं देख लो कल जो देखोगे तो मंज़र दूसरा हो जाएगा।
ज़ेबा जोनपुरी के अशआर
अन्दाज़ कुछ अलग ही मेरे सोचने का है मंज़िल का सब को शौक़ मुझे रास्ते का है
डॉ. मेहबूब राही के अशआर
लखनऊ के कुछ शायरों के यादगार अशआर
दुनिया का वरक़ दीदा-ए-अरबाब-ए-नज़र में इक ताश का पत्ता है कफ़-ए-शोबदागर में ---सफ़ी
ईद और चाँद से मुताल्लिक़ अशआर
घर-घर जाकर तुम यारों से आज सईद मिलो भूल के सारी गुज़री बातें, दिल से ईद मिलो
जोया के अशआर
मीर के अशआर
चकबस्त के अशआर
है मेरा ज़ब्ते-जुनूँ, जोशे-जुनूँ से बढ़कर नंग है मेरे लिए चाक गरेबाँ होना
शे'री भोपाली के मुनफरिद अशआर
जाँनिसार अख्तर के मुनफ़रिद अशआर
. ये ठीक है कि सितारों पे घूम आए हम मगर किसे है सलीक़ा ज़मीं पे चलने का
दोस्त और दोस्ती से मुताल्लिक़ मुनफ़रिद अशआर
शनिवार, 9 अगस्त 2008
दोस्तों इस क़दर सदमे हुए हैं जान पर दिल से दुश्मन की अदावत का गिला जाता रहा
बहुत मुश्किल है दुनिया का संवरना
गुरुवार, 7 अगस्त 2008
बहुत मुश्किल है दुनिया का संवरना तेरी ज़ुल्फ़ों का पच-ओ-ख़म नहीं है
जिगर के मुनफ़रीद अशआर
तोहीन-ए-इश्क़ देख न हो ऎ जिगर न हो, हो जाए दिल का खून मगर आँख तर न हो
सुकून-ए-दिल : मुनफ़रीद अशआर
शनिवार, 12 जुलाई 2008
सुकून-ए-दिल जहान-ए-बेश-ओ-कम में ढूँढने वाले यहाँ हर चीज़ मिलती है सुकून-ए-दिल नहीं मिलता
मुनफरीद अशआर : अकबर इलाहाबादी
शनिवार, 14 जून 2008
खिलाफ़-ए-शरअ बभी शेख थूकता भी नहीं, मगर अंधेरे उजाले में चूकता भी नहीं
अदम के मुनफ़रीद अशआर
शनिवार, 14 जून 2008
हमारी सिम्त से पीर-ए-मुग़ाँ से ये कह दो छुड़ा के पीछा ग़म-ए-दो जहाँ से आते हैं
मजाज़ के मुनफ़रीद अशआर
मंगलवार, 10 जून 2008
हम अर्ज़-ए-वफ़ा भी कर न सके, कुछ कह न सके कुछ सुन न सके याँ हमने ज़ुबाँ ही खोली थी, वाँ आँख झुकी शर्मा
खुमार बाराबंकवी के मुनफ़रीद अशआर
रात बाक़ी थी जब वो बिछड़े थे, कट गई उम्र रात बाक़ी है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के मुनफ़रीद अशआर
बुधवार, 21 मई 2008
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