ज्योति जैन

लेखिका स्वतंत्र तथा वामा साहित्य मंच-इंदौर की सचिव हैं।
शशि की आदत थी महीने का बजट बनाने की। उन्होंने अपनी मां को यही करते देखा था। सुमेर को कोई मतलब नहीं था क्योंकि वे एक तय...
मां बनने की आहट ज़िन्दगी में कई बदलाव लाती है बेटा..... सिर्फ शारीरिक ही नहीं..... और भी कई.....। जब अपने परिजनों को ये शुभ सूचना...
बिटिया को भी ये संदेश इस कार्टून फिल्म के माध्यम से समझ आया कि क्रोध व दुख से वातावरण अच्छा नहीं होता ...सब निगेटिव होता...
तो बांटने की प्रथा को जारी रखते हुए.. आज बांटते हैं.. रोशनी..नन्हे दीप की.. जो जले मेरी देहरी पर,उजाला हो तेरे आंगन में .... जो...
कोरोना के कहर से चल रहे लॉकडाउन ने कई बातें सोचने पर मजबूर कर दिया है..। जिनमें से एक है मानवता की सेवा...समाज की सेवा...मुझे...
मुझे लगता है ये वो दिन हैं जब आप अपने जीवनसाथी के साथ बहुत खुबसूरत समय बिता सकते हैं..। अपने लिए तो हम हमेशा समय चुरा लेते...
गणतंत्र के इतने वर्षों में, क्या खोया क्या पाया है....खोने की तो फिक्र नहीं, पाने की चाह सब रखते हैं...सदियों के तप के बाद...
यानी जब भी देशसेवा का जिक्र हो तो उसका सीधा सा अर्थ आम नागरिक सेना के जवान से ही लेता है। ये सही है कि सैनिक देश की सेवा...
समाचार देख सुनकर इससे ज्यादा प्रसन्नता पहले कभी नहीं हुई..। रुपहले पर्दे पर स्त्री के शीलभंग करने वाले खलनायक को जब...
बात जब एकता..अखण्डता... भाईचारे व शांति की है तो वह आचरण में भी झलकना चाहिए...
उस साहित्यिक आयोजन में सभागार के बाहर ही एक कुर्सी व मेज लिए आगंतुकों के नाम, पते व हस्ताक्षर करवाने एक व्यक्ति बैठा...
आखिरकार किसी ने समझी.. मेरे मन की बात... कोई है जो समझ गया है.. नारी के जज़्बात... तीन तलाक की लटक रही थी... मेरे सिर तलवार... अब...
प्यार और विश्वास से मांजा सूता, तो कटूंगी नहीं। रहूंगी हरदम, तुम्हारे साथ। क्योंकि-
सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाओं के दो टुकड़े कर देने जैसे बयान सामने आए हैं। इसके पूर्व में भी कई जगह धर्मस्थलों...
"इन लम्पट पुरुषों का चेहरा तो उजागर होना ही चाहिए....!" "और क्या... कमीनों की करतूतों के बारे में सबको पता तो चले..."
महसूस कर सकती हूँ मेरी सफलता पर तुम्हारी खुशी आज, जब बेटी कामयाबी का शिखर चूमती है, क्षमा कर दोगी मां, मेरी भूलों को,...
हर छोटे-बड़े कार्य में देशहित का सोचें व उस पर अमल करें तो शायद बिना वर्दी के भी सच्ची देशभक्ति होगी। पढ़ें 13 बातें...
महसूस कर सकती हूं मेरी सफलता पर तुम्हारी खुशी आज, जब बेटी कामयाबी का शिखर चूमती है, क्षमा कर दोगी मां, मेरी भूलों को,...
हममें से प्रत्येक नागरिक किसी न किसी रूप में, प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से देश की सेवा कर सकता है, यदि वह चाहे तो।